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जो भी है आदमी से कमतर है!
रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है, इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी
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हमको यूं ही प्यासा छोड़!
आज एक बार फिर मैं अपने ज़माने में काव्य मंचों के एक लोकप्रिय कवि/शायर रहे स्वर्गीय से बेकल उत्साही जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| बेकल जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बेकल उत्साही जी की यह ग़ज़ल – हम को यूँ ही…
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छीन पाओ तो कोई बात बने!
ज़िंदगी भीक में नहीं मिलती ज़िंदगी बढ़ के छीनी जाती है, अपना हक़ संग-दिल ज़माने से छीन पाओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी
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सर उठाओ तो कोई बात बने!
पोंछ कर अश्क अपनी आँखों से मुस्कुराओ तो कोई बात बने, सर झुकाने से कुछ नहीं होता सर उठाओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी
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गणित का गीत!
आज एक बार फिर मैं किसी जमाने में काव्य मंचों पर अपने गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सरोज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी…