मैं फूल टाँक रहा हूँ तुम्हारे जूड़े में,
तुम्हारी आँख मसर्रत से झुकती जाती है|
न जाने आज मैं क्या बात कहने वाला हूँ,
ज़बान ख़ुश्क है आवाज़ रुकती जाती है|
तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं|
साहिर लुधियानवी
A sky full of cotton beads like clouds
मैं फूल टाँक रहा हूँ तुम्हारे जूड़े में,
तुम्हारी आँख मसर्रत से झुकती जाती है|
न जाने आज मैं क्या बात कहने वाला हूँ,
ज़बान ख़ुश्क है आवाज़ रुकती जाती है|
तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं|
साहिर लुधियानवी
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