मिल के भी पराए हैं!

मिरे गले में तुम्हारी गुदाज़ बाहें हैं,

तुम्हारे होंटों पे मेरे लबों के साए हैं|

मुझे यक़ीं है कि हम अब कभी न बिछड़ेंगे,

तुम्हें गुमान कि हम मिल के भी पराए हैं|

तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं|

साहिर लुधियानवी

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