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आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शायद शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का यह गीत – आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव मेंजनता है चिन्ता की मारी मेरे गाँव में फिर वही चौराहे होंगे,…
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मिट्टी के घड़े होते हैं!
एक ही वक़्त में प्यासे भी हैं सैराब भी हैं,हम जो सहराओं की मिट्टी के घड़े होते हैं| अज़हर फ़राग़
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धूप में साया बने !
धूप में साया बने तन्हा खड़े होते हैं,बड़े लोगों के ख़सारे भी बड़े होते हैं| अज़हर फ़राग़
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हसरतों का ही निशाँ हो!
आरज़ूओं की भी इक भीड़ है शहर-ए-दिल में,हसरतों का ही निशाँ हो ये ज़रूरी तो नहीं| साहिर होशियारपुरी
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पिपरा के पतवा सरीखे डोले मनवा कि जियरा में उठत हिलोर!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- फ़िल्म- गोदानगीतकार- अंजानसंगीतकार- रविशंकरगायक- मोहम्मद रफ़ीप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *****
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आरज़ू शोला-ब-जाँ हो!
ज़ब्त भी होता है अंदाज़-ए-जुनूँ में शामिल,आरज़ू शोला-ब-जाँ हो ये ज़रूरी तो नहीं| साहिर होशियारपुरी
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ऐसे क्षण आए जीवन में!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शायद शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का यह गीत – ऐसे क्षण आए जीवन में, माटी कंचन लगे!नयन रह जायें ठगे-ठगे! तन लहराये अगरु गन्ध-सामन लहरे किसलय-सा,हर पल…
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वो मिरे दिल का धुआँ हो!
उन की आँखों में छलक आए हैं आँसू जिस से, वो मिरे दिल का धुआँ हो ये ज़रूरी तो नहीं| साहिर होशियारपुरी
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वो मोहब्बत का बयाँ हो!
हम जिसे अपनी ज़बाँ से भी न कहने पाएँ,वो मोहब्बत का बयाँ हो ये ज़रूरी तो नहीं| साहिर होशियारपुरी