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ख़ाक में मिल जाएगी!
रोज़-ओ-शब हम को भी समझाती है मिट्टी क़ब्र की, ख़ाक में मिल जाएगी तेरी भी हस्ती एक दिन| मुनव्वर राना
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सहरा को बस्ती एक दिन!
तुम को ऐ वीरानियों शायद नहीं मा’लूम है,हम बनाएँगे इसी सहरा को बस्ती एक दिन| मुनव्वर राना
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सैंया निकस गए मैं ना लड़ी थी!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में सत्यम शिवम सुंदरम फिल्म के आध्यात्मिक गीत का अंश- सैंया निकस गए मैं ना लड़ी थी! फिल्म- सत्यम शिवम सुंदरममुख्य कलाकार- शशि कपूर, जीनत अमानगीतकार- विट्ठल भाई पटेलसंगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलालगायिका- लता मंगेशकरप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******
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थोड़ी सी सस्ती एक दिन!
कैसे कैसे लोग दस्तारों* के मालिक हो गए,बिक रही थी शहर में थोड़ी सी सस्ती एक दिन|*पगड़ी मुनव्वर राना
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एक दिन ख़ाना-बदोशी!
देने वाले ने तबीअ’त क्या अजब दी है उसे,एक दिन ख़ाना-बदोशी घर-गृहस्ती एक दिन| मुनव्वर राना
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फूल ने भूले से की थी!
चूसता रहता है रस भौंरा अभी तक देख लो,फूल ने भूले से की थी सरपरस्ती एक दिन| मुनव्वर राना
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जंगल-परस्ती एक दिन!
ख़ून रुलवाएगी ये जंगल-परस्ती एक दिन,सब चले जाएँगे ख़ाली कर के बस्ती एक दिन| मुनव्वर राना
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महँगाई के मौसम में ये!
ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं शर्मिंदा बहुत हूँ,महँगाई के मौसम में ये त्यौहार पड़ा है| मुनव्वर राना
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अन्त के बाद-1
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इसी शीर्षक से उनकी दो कविताएं हैं पहली यहाँ प्रस्तुत है। वाजपेयी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – अन्त के बादहम चुपचाप नहीं…