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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Nov 2022

    निर्बीज क्यों हो चले हम!

    आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– इस तरह निर्बीज -सेक्यों हो चले हम आजहरियल घास…

  • 19th Mar 2026

    कल चौदहवीं की रात थी!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में इब्न-ए-इंशा साहब की लिखी प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह जी ने बड़ी खूबसूरती से गाया है- कल चौदहवीं की रात थी, शब भर रहा चर्चा तेरा! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद! *******

  • 19th Mar 2026

    गिरे ताड़ से!

    आज एक बार फिर मैं वरिष्ठ हिंदी नवगीतकार श्री नचिकेता जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नचिकेता जी की कुछ ही रचनाएं मैंने पहले शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नचिकेता जी का यह नवगीत– गिरे ताड़ सेमगर बीच में हीखजूर पर हम अँटके।घर की झोल लगी दीवारों पर हैंचमगादड़ लटकेखूस…

  • 18th Mar 2026

    वो रवानी दे गया!

    सर मिरे सीने पे उस ने जब रखा है ज़िंदगी,इस तरह दरिया-ए-दिल को वो रवानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 18th Mar 2026

    ऐसी कहानी दे गया!

    सुनते सुनते दास्ताँ सो जाएँगे सब चारागर,ख़त्म जो होगी नहीं ऐसी कहानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 18th Mar 2026

    आँखों में पानी दे गया!

    जाते जाते वो मुझे अपनी निशानी दे गया,ज़िंदगी-भर के लिए आँखों में पानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 18th Mar 2026

    हम डोले ऑल अलोंग!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज सिर्फ दो लाइन की टाइम पास, हिंग्लिश, आप इसे कविता भी कह सकते हैं, कहीं सुना था बहुत पहले, वही उगल दे रहा हूँ- आशा है आपको पसंद आई होगी,धन्यवाद। ******

  • 18th Mar 2026

    कोई परिंदा मुझ में!

    उड़ता रहता है रातों को,‘क़ैसर’ कोई परिंदा मुझ में। नज़ीर क़ैसर

  • 18th Mar 2026

    ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से कल मैंने ‘बरसात की रात’ फिल्म का इसी शीर्षक वाला गीत जो लता जी ने गाया था, वह प्रस्तुत किया था, आज मैं अपने स्वर में, इसी शीर्षक वाला वह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो रफी साहब ने गाया था- ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात,…

  • 18th Mar 2026

    बरस रही थी बारिश!

    बरस रही थी बारिश बाहर,और वो भीग रहा था मुझ में। नज़ीर क़ैसर

  • 18th Mar 2026

    मैं चलता!

    आज एक बार फिर मैं वरिष्ठ हिंदी नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– मैं चलतामेरे साथ चला करता पग-पगवह सत्य कि जिसको पाकरधन्य हुआ जीवन ।…

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