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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Oct 2026

    टुकड़े-टुकड़े दिन बीता!

    आज मैं श्रेष्ठ अभिनेत्री और शायरा स्वर्गीय मीना कुमारी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मीना कुमारी जी की यह ग़ज़ल – टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिलीजिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है…

  • 13th Oct 2026

    अँधेरों में चराग़ों से जले हैं!

    वो भी तो हमें छोड़ के रुख़्सत हुए कब के,हम जिन के अँधेरों में चराग़ों से जले हैं| विजेंद्र सिंह परवाज़

  • 13th Oct 2026

    फिल्मी गीतों में वफा, दोस्ती, दुश्मनी

    प्रस्तुत है मेरी यह यूट्यूब लाइव प्रस्तुति, इस लाइव प्रस्तुति में मैंने दोस्ती, प्रेम और दुश्मनी के भाव दर्शाने वाले कुछ गीत चुने थे। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । *****

  • 13th Oct 2026

    कोई रंग तो दो!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह शेर- कोई रंग तो दो मेरे चेहरे को!शायर- उबेदुल्लाह अलीमगायक- ग़ुलाम अली आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 13th Oct 2026

    आँधी में उसी पेड़ से!

    छोड़ा न गया धूप में जिस पेड़ का साया,आँधी में उसी पेड़ से हम बच के चले हैं| विजेंद्र सिंह परवाज़

  • 13th Oct 2026

    दुनिया में वही लोग!

    दुनिया में वही लोग बुरे हैं जो भले हैं,ढूँडोगे अंधेरे तो चराग़ों के तले हैं| विजेंद्र सिंह परवाज़

  • 13th Oct 2026

    आज कल में ढल गया!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत-आज कल में ढल गया दिन हुआ तमाम !फिल्म- बेटी बेटे मुख्य कलाकार- सुनील दत्त, बी सरोजा देवीगीतकार- शैलेन्द्र संगीतकार- शंकर जयकिशन गायक- मोहम्मद रफ़ी. लता मंगेशकर प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 12th Oct 2026

    रमेश रंजक जी के नवगीत

    स्वर्गीय रमेश रंजक जी हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार थे, उनका हिंदी नवगीतों के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान है। आज मैं उनके कुछ श्रेष्ठ नवगीत शेयर कर रहा हूँ। आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। *******

  • 12th Oct 2026

    कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह शेर- कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों मेंयह ग़ुलाम अली जी की गाई एक प्रसिद्ध ग़ज़ल है।शायर- उबेदुल्लाह अलीमगायक- ग़ुलाम अली आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 12th Oct 2026

    किसी के हुक्म का पाबंद!

    किसी के हुक्म का पाबंद हो के क्या पाया,के अब तो साँस भी आए तो ख़ुद-कुशी सी लगे| विजेंद्र सिंह परवाज़

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