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निर्बीज क्यों हो चले हम!
आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– इस तरह निर्बीज -सेक्यों हो चले हम आजहरियल घास…
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मगर ग़रीब की जाँ का!
मैं अपने बच्चों की ख़ातिर ही जान दे देता,मगर ग़रीब की जाँ का मुआवज़ा कम है| नवाज़ देवबंदी
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चुरा लिया है तुमने जो दिल को!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं , अपने स्वर में, फिल्म- ‘यादों की बारात’ के लिए आशा भोसले जी और मोहम्मद रफी जी का गाया रोमांटिक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नज़र नहीं चुराना सनम! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******
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फ़ुज़ूल तेज़ हवाओं को!
फ़ुज़ूल तेज़ हवाओं को दोश देता है,उसे चराग़ जलाने का हौसला कम है| नवाज़ देवबंदी
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जब मैं हार गया!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मैंने उनकी अधिक रचनाएं शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता– जब मैं हार गया सब कुछ करकेमुझे नींद आ गई ।जब मैं गुहार लगाते-लगाते थक गयामुझे नींद आ गईजब मैं…
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तुम उदास रहते हो!
बिला सबब ही मियाँ तुम उदास रहते हो,तुम्हारे घर से तो मस्जिद का फ़ासला कम है| नवाज़ देवबंदी
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दरीचों से झाँकता कम है!
वो अपने घर के दरीचों से झाँकता कम है,तअ’ल्लुक़ात तो अब भी हैं राब्ता कम है| नवाज़ देवबंदी
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जितना कम सामान रहेगा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं नीरज जी के कुछ अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- जितना कम सामान रहेगा, उतना सफर आसान रहेगा! आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******
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‘नवाज़’ ऐसे दिए को!
हवा की शह पे जलाता है घर ग़रीबों के,‘नवाज़’ ऐसे दिए को दिया कहूँ कैसे| नवाज़ देवबंदी