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निर्बीज क्यों हो चले हम!
आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– इस तरह निर्बीज -सेक्यों हो चले हम आजहरियल घास…
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पढ़ने-पढ़ाने की उम्र है!
हँसने-हँसाने पढ़ने-पढ़ाने की उम्र है,ये उम्र कब हमारे कमाने की उम्र है| अज़हर फ़राग़
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न जी भर के देखा न कुछ बात की!
मशहूर शायर बशीर बद्र जी का दो दिन पहले देहांत हो गया, उर्दू शायरी के लिए उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है। उनकी स्मृति में में अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूं। शायर- बशीर बद्रगायक- चंदन दासप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। ******
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हम अगर ख़्वाब में भी!
आँख खुलते ही जबीं चूमने आ जाते हैं,हम अगर ख़्वाब में भी तुम से लड़े होते हैं| अज़हर फ़राग़
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आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शायद शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का यह गीत – आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव मेंजनता है चिन्ता की मारी मेरे गाँव में फिर वही चौराहे होंगे,…
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मिट्टी के घड़े होते हैं!
एक ही वक़्त में प्यासे भी हैं सैराब भी हैं,हम जो सहराओं की मिट्टी के घड़े होते हैं| अज़हर फ़राग़
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धूप में साया बने !
धूप में साया बने तन्हा खड़े होते हैं,बड़े लोगों के ख़सारे भी बड़े होते हैं| अज़हर फ़राग़
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हसरतों का ही निशाँ हो!
आरज़ूओं की भी इक भीड़ है शहर-ए-दिल में,हसरतों का ही निशाँ हो ये ज़रूरी तो नहीं| साहिर होशियारपुरी