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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Nov 2022

    निर्बीज क्यों हो चले हम!

    आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– इस तरह निर्बीज -सेक्यों हो चले हम आजहरियल घास…

  • 16th Apr 2026

    मगर ग़रीब की जाँ का!

    मैं अपने बच्चों की ख़ातिर ही जान दे देता,मगर ग़रीब की जाँ का मुआवज़ा कम है| नवाज़ देवबंदी

  • 16th Apr 2026

    चुरा लिया है तुमने जो दिल को!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं , अपने स्वर में, फिल्म- ‘यादों की बारात’ के लिए आशा भोसले जी और मोहम्मद रफी जी का गाया रोमांटिक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नज़र नहीं चुराना सनम! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 16th Apr 2026

    फ़ुज़ूल तेज़ हवाओं को!

    फ़ुज़ूल तेज़ हवाओं को दोश देता है,उसे चराग़ जलाने का हौसला कम है| नवाज़ देवबंदी

  • 16th Apr 2026

    जब मैं हार गया!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मैंने उनकी अधिक रचनाएं शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता– जब मैं हार गया सब कुछ करकेमुझे नींद आ गई ।जब मैं गुहार लगाते-लगाते थक गयामुझे नींद आ गईजब मैं…

  • 15th Apr 2026

    तुम उदास रहते हो!

    बिला सबब ही मियाँ तुम उदास रहते हो,तुम्हारे घर से तो मस्जिद का फ़ासला कम है| नवाज़ देवबंदी

  • 15th Apr 2026

    वो सोचता है बहुत!

    तुम इस ख़मोश तबीअत पे तंज़ मत करना,वो सोचता है बहुत और बोलता कम है| नवाज़ देवबंदी

  • 15th Apr 2026

    दरीचों से झाँकता कम है!

    वो अपने घर के दरीचों से झाँकता कम है,तअ’ल्लुक़ात तो अब भी हैं राब्ता कम है| नवाज़ देवबंदी

  • 15th Apr 2026

    जितना कम सामान रहेगा!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं नीरज जी के कुछ अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- जितना कम सामान रहेगा, उतना सफर आसान रहेगा! आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******

  • 15th Apr 2026

    ‘नवाज़’ ऐसे दिए को!

    हवा की शह पे जलाता है घर ग़रीबों के,‘नवाज़’ ऐसे दिए को दिया कहूँ कैसे| नवाज़ देवबंदी

  • 15th Apr 2026

    जो तुझ से कहना है!

    जो तुझ से कहना है दुनिया से वो छुपाना है,अगर ग़ज़ल न कहूँ तो बता कहूँ कैसे| नवाज़ देवबंदी

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