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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Nov 2022

    निर्बीज क्यों हो चले हम!

    आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– इस तरह निर्बीज -सेक्यों हो चले हम आजहरियल घास…

  • 1st Sep 2026

    रंग है न पानी है!

    ‘कैफ़’ तुझ को दुनिया ने क्या से क्या बना डाला,यार अब तिरे मुँह पर रंग है न पानी है| कैफ़ भोपाली

  • 1st Sep 2026

    हम भी दिल की बात!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में वसीम बरेलवी जी का एक और शेर- हम भी दिल की बात कहाँ कह पाते हैं! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 1st Sep 2026

    पूछते हो क्या बाबा!

    पूछते हो क्या बाबा क्या हुआ दिल-ए-ज़िंदा,वो मिरा दिल-ए-ज़िंदा आज आँ-जहानी है| कैफ़ भोपाली

  • 1st Sep 2026

    ज़िंदगी आज की एक अंधा कुआं!

    बंगलौर के एक साहित्यिक आयोजन में मैंने काव्य पाठ किया उसका वीडिओ अवलोकनार्थ प्रस्तुत हैMy poetry recital in Bangalore – ज़िंदगी आज की एक अंधा कुआं – आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *****

  • 1st Sep 2026

    अरे यार मेरी तुम भी हो ग़ज़ब!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- अरे यार मेरी तुम भी हो ग़ज़ब घूंघट तो जरा ओढो!फिल्म- तीन देवियां मुख्य कलाकार- देव आनंद, नंदा, सिमी ग्रेवाल गीतकार- मजरुह सुल्तानपुरी संगीतकार- सचिन देव बर्मन गायक- किशोर कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******

  • 1st Sep 2026

    चाहत है चूल्हे पर चढ़े!

    आज मैं श्रेष्ठ कवि नचिकेता जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नचिकेता जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है नचिकेता जी का यह नवगीत- चाहत हैचूल्हे पर चढ़ेतवे की आँच बनूँ।अभी पकी रोटी काजीवन से सम्वाद बनूँजांगर की ख़ातिर कुट्टीचुन्नी की नाद बनूँतेज़ भूख की बेचैनी कातीआ-पाँच…

  • 31st Aug 2026

    मुकेश जी के कुछ और गीत !

    मेरे यूट्यूब लाइव के अंतर्गत मैंने अपने स्वर में मुकेश जी के कुछ गीतों की झलकियां पहले प्रस्तुत की थीं, प्रस्तुत हैं मुकेश जी के कुछ और गीत मेरे स्वर में मुकेश जी के कुछ और गीतों की झलकियां आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद । *****

  • 31st Aug 2026

    बीते हुए दिन खुद को!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में वसीम बरेलवी जी का एक शेर- बीते हुए दिन खुद को जब दोहराते हैं! आशा है आपको ये पसंद आएगा,धन्यवाद । ******

  • 31st Aug 2026

    आज मेरे अश्कों का!

    शायद उन के दामन ने पोंछ दीं मिरी आँखें,आज मेरे अश्कों का रंग ज़ाफ़रानी है| कैफ़ भोपाली

  • 31st Aug 2026

    आँधियाँ भी पगली हैं!

    घास के घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या,आँधियाँ भी पगली हैं बर्क़ भी दिवानी है| कैफ़ भोपाली

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