छोड़ा न गया धूप में जिस पेड़ का साया,
आँधी में उसी पेड़ से हम बच के चले हैं|
विजेंद्र सिंह परवाज़
आँधी में उसी पेड़ से!
One response to “आँधी में उसी पेड़ से!”
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वाह वाह।
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A sky full of cotton beads like clouds
वाह वाह।
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