रवाँ है छोटी सी कश्ती हवाओं के रुख़ पर,
नदी के साज़ पे मल्लाह गीत गाता है|
तुम्हारा जिस्म हर इक लहर के झकोले से,
मिरी खुली हुई बाहोँ में झूल जाता है|
तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं|
साहिर लुधियानवी
A sky full of cotton beads like clouds
रवाँ है छोटी सी कश्ती हवाओं के रुख़ पर,
नदी के साज़ पे मल्लाह गीत गाता है|
तुम्हारा जिस्म हर इक लहर के झकोले से,
मिरी खुली हुई बाहोँ में झूल जाता है|
तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं|
साहिर लुधियानवी
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