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रिहाई तो नहीं माँगी थी
तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी, क़ैद माँगी थी रिहाई तो नहीं माँगी थी| हसरत जयपुरी
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मिरे साथ साथ चलकर!
मिरी तेज़-गामियों से नहीं बर्क़ को भी निस्बत, कहीं खो न जाए दुनिया मिरे साथ साथ चल कर| शकील बदायूनी
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यूँही करवटें बदल कर!
हैं किसी के मुंतज़िर हम मगर ऐ उमीद-ए-मुबहम, कहीं वक़्त रह न जाए यूँही करवटें बदल कर| शकील बदायूनी
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फूल को मसल कर!
ग़म-ए-उम्र-ए-मुख़्तसर से अभी बे-ख़बर हैं कलियाँ, न चमन में फेंक देना किसी फूल को मसल कर| शकील बदायूनी
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दो क़दम ही चल कर!
न मिला सुराग़-ए-मंज़िल कभी उम्र भर किसी को, नज़र आ गई है मंज़िल कभी दो क़दम ही चल कर| शकील बदायूनी
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मिरी ज़िंदगी बदलकर!
ग़म-ए-इश्क़ रह गया है ग़म-ए-जुस्तुजू में ढलकर, वो नज़र से छुप गए हैं मिरी ज़िंदगी बदल कर| शकील बदायूनी
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उनकी ख़ुशी मुझे!
राज़ी हों या ख़फ़ा हों वो जो कुछ भी हों ‘शकील,’ हर हाल में क़ुबूल है उनकी ख़ुशी मुझे| शकील बदायूनी