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और सज़ा उसकी है!
सारी हैरत है मिरी सारी अदा उसकी है, बे-गुनाही है मिरी और सज़ा उसकी है| जावेद अख़्तर
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हम ठहरे बंजारे लोग!
इस नगरी में क्यूँ मिलती है रोटी सपनों के बदले, जिन की नगरी है वो जानें हम ठहरे बंजारे लोग| जावेद अख़्तर
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कैसे प्यारे प्यारे लोग!
नेकी इक दिन काम आती है हम को क्या समझाते हो, हम ने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग| जावेद अख़्तर
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साँसों के इक्तारे लोग!
वक़्त सिंघासन पर बैठा है अपने राग सुनाता है, संगत देने को पाते हैं साँसों के इक्तारे लोग| जावेद अख़्तर
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धीरे धीरे हारे लोग!
जीवन जीवन हमने जग में खेल यही होते देखा, धीरे धीरे जीती दुनिया धीरे धीरे हारे लोग| जावेद अख़्तर
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कैसे हैं बेचारे लोग!
दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग, जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग| जावेद अख़्तर
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जग में रह जाएंगे, प्यारे तेरे बोल!!
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का एक बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, और इस गीत के माध्यम से ही मैं मुकेश जी, राज कपूर साहब और मजरूह सुल्तानपुरी साहब को भी याद कर…
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अपना गान!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य के एक मजबूत स्तंभ और एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद अज्ञेय जी की यह कविता – इसी में ऊषा का…