Category: Uncategorized
-
पतवार!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी का यह गीत – तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार। आज सिन्धु ने…
-
मैं ने तो होंट सी लिए!
मैं ने तो होंट सी लिए इस दिल को क्या करूँ, बे-इख़्तियार तुम को पुकारा कभी कभी| असर लखनवी
-
ख़ुद को तसल्ली देना!
ख़ुद को तसल्ली देना कितना मुश्किल होता है, कोई क़ीमती चीज़ अचानक जब भी खोती है| शहरयार
-
धरती में नींदें बोती है!
ख़्वाब देखने की हसरत में तन्हाई मेरी, आँखों की बंजर धरती में नींदें बोती है| शहरयार
-
यादों के सैलाब में!
यादों के सैलाब में जिस दम मैं घिर जाता हूँ, दिल-दीवार उधर जाने की ख़्वाहिश होती है| शहरयार
-
कनुप्रिया – पहला गीत
आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में अपना योगदान करने वाले, श्रेष्ठ हिन्दी कवि और संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह उनकी काव्य पुस्तक ‘कनुप्रिया’ का पहला गीत है| भारती जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…
-
जागता हूँ मैं एक अकेला!
जागता हूँ मैं एक अकेला दुनिया सोती है, कितनी वहशत हिज्र की लम्बी रात में होती है| शहरयार