वो पेड़ जिनके तले हम पनाह लेते थे,
खड़े हैं आज भी साकित किसी अमीं की तरह|
उन्ही के साए में फिर आज दो धड़कते दिल,
ख़मोश होंटों से कुछ कहने सुनने आए हैं|
साहिर लुधियानवी
A sky full of cotton beads like clouds
वो पेड़ जिनके तले हम पनाह लेते थे,
खड़े हैं आज भी साकित किसी अमीं की तरह|
उन्ही के साए में फिर आज दो धड़कते दिल,
ख़मोश होंटों से कुछ कहने सुनने आए हैं|
साहिर लुधियानवी
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