दुआएँ क़ुबूल हो जाएँ!

धड़कते दिल से लरज़ती हुई निगाहों से,

हुज़ूर-ए-ग़ैब में नन्ही सी इल्तिजा की थी|

कि आरज़ू के कँवल खिल के फूल हो जाएँ,

दिल-ओ-नज़र की दुआएँ क़ुबूल हो जाएँ|

साहिर लुधियानवी

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