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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-8
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज आठवां दिन है । इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, उनका…
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हर लम्हा मुझ में!
साहिल की गीली रेत पे बच्चों के खेल सा, हर लम्हा मुझ में बनता बिखरता हुआ सा कुछ| निदा फ़ाज़ली
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रास्ता खुलता नहीं कहीं!
होता है यूँ भी रास्ता खुलता नहीं कहीं, जंगल सा फैल जाता है खोया हुआ सा कुछ| निदा फ़ाज़ली
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-7
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज सातवां दिन है । इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, उनका…
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चाँद में कैसे हुई क़ैद!
चाँद में कैसे हुई क़ैद किसी घर की ख़ुशी, ये कहानी किसी मस्जिद की अज़ाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली