रंगीं लब, आँखें जादू!

जिस्म दमकता, ज़ुल्फ़ घनेरी, रंगीं लब, आँखें जादू,

संग-ए-मरमर, ऊदा बादल, सुर्ख़ शफ़क़, हैराँ आहू|

                 जावेद अख़्तर

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