ज़रा सा बीज उठा ले!

ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा,

ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है|

           गुलज़ार

2 responses to “ज़रा सा बीज उठा ले!”

Leave a comment