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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Jul 2024

    पढ़वाना चाहते थे!

    पढ़वाना चाहते थे नुजूमी से हम वही, हम से क़दम ज़मीन पे रक्खा नहीं गया| राजेश रेड्डी

  • 23rd Jul 2024

    वो देखना पड़ा है!

    आँखों पे ऐसा वक़्त भी गुज़रा है बार-हा, वो देखना पड़ा है जो देखा नहीं गया| राजेश रेड्डी

  • 23rd Jul 2024

    हमसे वहाँ पहुँच के!

    दुनिया से, जिस से आगे का सोचा नहीं गया, हम से वहाँ पहुँच के भी ठहरा नहीं गया| राजेश रेड्डी

  • 23rd Jul 2024

    श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-5

    मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज पांचवां दिन है, जैसा मैंने पहले कहा, मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा,…

  • 22nd Jul 2024

    मुसीबत उसे भी थी!

    ‘मोहसिन’ मैं उस से कह न सका यूँ भी हाल दिल, दरपेश एक ताज़ा मुसीबत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी

  • 22nd Jul 2024

    तन्हा हुआ सफ़र में!

    तन्हा हुआ सफ़र में तो मुझ पे खुला ये भेद, साए से प्यार धूप से नफ़रत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी

  • 22nd Jul 2024

    सुनता था वो भी!

    सुनता था वो भी सब से पुरानी कहानियाँ, शायद रफ़ाक़तों की ज़रूरत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी

  • 22nd Jul 2024

    क़यामत उसे भी थी!

    वो मुझ से बढ़ के ज़ब्त का आदी था जी गया, वर्ना हर एक साँस क़यामत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी

  • 22nd Jul 2024

    अदावत उसे भी थी!

    मुझ से बिछड़ के शहर में घुल-मिल गया वो शख़्स, हालाँकि शहर-भर से अदावत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी

  • 22nd Jul 2024

    फ़राग़त उसे भी थी!

    उस रात देर तक वो रहा महव-ए-गुफ़्तुगू, मसरूफ़ मैं भी कम था फ़राग़त* उसे भी थी| *निश्चिंतता मोहसिन नक़वी

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