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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Jan 2024

    क़दम क़दम पे कोई!

    गुज़र ही आए किसी तरह तेरे दीवाने, क़दम क़दम पे कोई सख़्त मरहला तो रहा|               जाँ निसार अख़्तर

  • 3rd Jan 2024

    हौसला तो रहा!

    तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा, ये कम नहीं हमें जीने का हौसला तो रहा|            जाँ निसार अख़्तर

  • 3rd Jan 2024

    दिल में अपने दर्द की!

    दिल में अपने दर्द की छिटकी हुई है चाँदनी, हर तरफ़ फैली हुई है तीरगी ये मत कहो|             जाँ निसार अख़्तर

  • 3rd Jan 2024

    उनके वादों में हुई है!

    जितने वादे कल थे उतने आज भी मौजूद हैं, उनके वादों में हुई है कुछ कमी ये मत कहो|              जाँ निसार अख़्तर 

  • 3rd Jan 2024

    चलना हमारा काम है!

    आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि स्वर्गीय शिव मंगल सिंह ‘सुमन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|  सुमन जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिव मंगल सिंह ‘सुमन’ जी की यह कविता –  गति प्रबल पैरों में भरीफिर क्यों रहूं…

  • 2nd Jan 2024

    पाँव इतने तेज़ हैं!

    पाँव इतने तेज़ हैं उठते नज़र आते नहीं, आज थक कर रह गया है आदमी ये मत कहो|                जाँ निसार अख़्तर

  • 2nd Jan 2024

    सोने की ज़ंजीरें कहाँ!

    कट सकी हैं आज तक सोने की ज़ंजीरें कहाँ, हम भी अब आज़ाद हैं यारो अभी ये मत कहो|              जाँ निसार अख़्तर

  • 2nd Jan 2024

    अक़्ल के आगे है क्या!

    हम से दीवानों के बिन दुनिया सँवरती किस तरह, अक़्ल के आगे है क्या दीवानगी ये मत कहो|              जाँ निसार अख़्तर

  • 2nd Jan 2024

    गुनगुनाहट तो सुनो!

    उस नज़र की उस बदन की गुनगुनाहट तो सुनो, एक सी होती है हर इक रागनी ये मत कहो|              जाँ निसार अख़्तर

  • 2nd Jan 2024

    जिस्म की हर बात है!

    जिस्म की हर बात है आवारगी ये मत कहो, हम भी कर सकते हैं ऐसी शायरी ये मत कहो|               जाँ निसार अख़्तर

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