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पढ़वाना चाहते थे!
पढ़वाना चाहते थे नुजूमी से हम वही, हम से क़दम ज़मीन पे रक्खा नहीं गया| राजेश रेड्डी
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वो देखना पड़ा है!
आँखों पे ऐसा वक़्त भी गुज़रा है बार-हा, वो देखना पड़ा है जो देखा नहीं गया| राजेश रेड्डी
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हमसे वहाँ पहुँच के!
दुनिया से, जिस से आगे का सोचा नहीं गया, हम से वहाँ पहुँच के भी ठहरा नहीं गया| राजेश रेड्डी
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-5
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज पांचवां दिन है, जैसा मैंने पहले कहा, मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा,…
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मुसीबत उसे भी थी!
‘मोहसिन’ मैं उस से कह न सका यूँ भी हाल दिल, दरपेश एक ताज़ा मुसीबत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
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तन्हा हुआ सफ़र में!
तन्हा हुआ सफ़र में तो मुझ पे खुला ये भेद, साए से प्यार धूप से नफ़रत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
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क़यामत उसे भी थी!
वो मुझ से बढ़ के ज़ब्त का आदी था जी गया, वर्ना हर एक साँस क़यामत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
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अदावत उसे भी थी!
मुझ से बिछड़ के शहर में घुल-मिल गया वो शख़्स, हालाँकि शहर-भर से अदावत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
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फ़राग़त उसे भी थी!
उस रात देर तक वो रहा महव-ए-गुफ़्तुगू, मसरूफ़ मैं भी कम था फ़राग़त* उसे भी थी| *निश्चिंतता मोहसिन नक़वी