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फ़राग़त उसे भी थी!
उस रात देर तक वो रहा महव-ए-गुफ़्तुगू, मसरूफ़ मैं भी कम था फ़राग़त* उसे भी थी| *निश्चिंतता मोहसिन नक़वी
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मुझ को भी शौक़ था!
मुझ को भी शौक़ था नए चेहरों की दीद का, रस्ता बदल के चलने की आदत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
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मोहब्बत उसे भी थी!
ज़िक्र-ए-शब-ए-फ़िराक़ से वहशत उसे भी थी, मेरी तरह किसी से मोहब्बत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-4
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज चौथा दिन है। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ।जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, पहली बार श्रीकृष्ण…
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झूट बोला है तो!
झूट बोला है तो क़ाएम भी रहो उस पर ‘ज़फ़र’, आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल
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कुछ न कुछ आख़िर!
दोस्ती के नाम पर कीजे न क्यूँकर दुश्मनी, कुछ न कुछ आख़िर तरीक़-ए-कार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल
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काम आसाँ है इसे !
बात पूरी है अधूरी चाहिए ऐ जान-ए-जाँ, काम आसाँ है इसे दुश्वार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल
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दीदार से आगे की बात!
अब वही करने लगे दीदार से आगे की बात, जो कभी कहते थे बस दीदार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल
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वो जो दरिया है तो!
डूब कर मरना भी उसलूब-ए-मोहब्बत हो तो हो, वो जो दरिया है तो उस को पार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल
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ख़्वाब की ताबीर पर!
ख़्वाब की ताबीर पर इसरार है जिन को अभी, पहले उन को ख़्वाब से बेदार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल