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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Apr 2021

    आज मन भारी है!

    स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी के अनेक गीत मैंने पहले शेयर किए हैं, आज एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| अवस्थी जी भावुकता के अर्थात मन के कवि थे| कोई कवि अपनी कविताओं में वीरता बघार सकता है, परंतु मन की बात तो उसको भावुक होकर ही कहानी होगी| लीजिए प्रस्तुत है मन के व्यथित…

  • 13th Apr 2021

    चोट और टूटना दिल का!

    जोश मलीहाबादी जी का प्रसिद्ध शेर है, जिसे गुलाम अली साहब ने एक ग़ज़ल के शुरू में गाया है- दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया, जब चली सर्द हवा, मैंने तुझे याद किया| वास्तव में जब सर्दी पड़ती है तब पुरानी चोटें भी कसकती हैं| हम अक्सर देखते हैं कि हमारे…

  • 12th Apr 2021

    वह चलती है, सुंदरता बिखेरते हुए!

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- पिछले कुछ दिनों में मैंने लॉर्ड बॉयरन की कुछ कविताओं का भावानुवाद प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। कविता में एक खूबसूरती यह भी होती है कि हर कोई उसे अपनी तरह से समझ सकता है। आज फिर से…

  • 11th Apr 2021

    Golden Bloggerz Award

    I have been nominated for Golden Bloggerz Award by my fellow blogger Priya Ji, who writes very interesting and thought provoking blog posts, by the name ‘Priya’s Learning Centre’. She is a nice human being, a true friend and a creative blogger. Her blog posts are quite useful and inspiring. (https://priyaslearningcentre.com) What is the Golden…

  • 10th Apr 2021

    दीपक जलता रहा रात भर!

    आज हिन्दी काव्य मंचों के एक अत्यंत लोकप्रिय गीतकार रहे स्वर्गीय गोपाल सिंह ‘नेपाली’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी प्रेम और ओज दोनों प्रकार के गीतों के लिए जाने जाते थे| लीजिए प्रस्तुत है नेपाली जी यह गीत- तन का दिया, प्राण की बाती,दीपक जलता रहा रात-भर । दु:ख की…

  • 9th Apr 2021

    कोई हंगामा करो ऐसे गुज़र होगी नहीं!

    दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के श्रेष्ठ साहित्यिक कवि थे और आपात्काल के दौरान जब उन्होंने एक के बाद एक विद्रोह के स्वरों को गुंजाने वाली ग़ज़लें लिखीं, तब वे जनता के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए| मुझे याद है उस समय कमलेश्वर जी साहित्यिक पत्रिका – ‘सारिका’ में निरंतर ये ग़ज़लें प्रकाशित करते थे और…

  • 8th Apr 2021

    मन का बुझा दीपक नहीं जलता!

    ऐसे बहुत से लोग होते हैं जिनको अतीत में रहना बहुत अच्छा लगता है और अक्सर वे वर्तमान का सामना करने से बचने के लिए भी अतीत में डेरा डाल लेते हैं, क्योंकि वहाँ वे अपने आपको ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं| मेरे साथ ऐसा तो नहीं है, परंतु चाहे वह कविता की बात हो…

  • 7th Apr 2021

    पेलोलिम- गोवा की एक खूबसूरत ‘बीच’!

    गोवा में रहते हुए कई वर्ष बीत चले, जब लोग यहाँ बाहर से घूमने के लिए आते हैं, तब उनका लक्ष्य होता है कि सीमित समय में जितना हो सकता है, उतना गोवा देख लें| मुख्य आकर्षण तो यहाँ के समुद्र-तट, यहाँ की खूबसूरत ‘बीच’ ही हैं, कुछ पुराने चर्च, फोर्ट आदि हैं, जहां फिल्मों…

  • 6th Apr 2021

    अणु-अणु का कंपन जान चली!

    मैंने छायावाद युग के कीर्तिस्तंभ रहे महाकवियों पंत, प्रसाद और निराला जी की एक-एक रचना शेयर करते हुए उस युग की एक झलक दिखाने का प्रयास किया था| बाद में मुझे खयाल आया कि महादेवी जी को शामिल किए बिना तो छायावाद युग की एक झलक देना भी संभव नहीं है| फिर जैसे मैंने निराला…

  • 4th Apr 2021

    जब हम दोनो ज़ुदा हुए

    आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| आज फिर से अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- हम…

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