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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Mar 2021

    सामने बैठा था मेरे, और वो मेरा न था!

    आज एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसके कुछ शेर ग़ुलाम अली जी ने और जगजीत सिंह तथा चित्रा सिंह की जोड़ी ने भी गाए हैं| काफी लंबी ग़ज़ल है ये और सिर्फ एक घटना हो जाने पर ज़िंदगी कितनी बदल जाती है, ये इसमें बहुत खूबसूरती से दर्शाया गया है| लीजिए आज प्रस्तुत है,…

  • 20th Mar 2021

    जग से परिचय, तुमसे परिणय!

    कविताएं शेयर करने के क्रम में, मैं सामान्यतः आधुनिक कवियों की रचनाएँ शेयर करता हूँ और इसमें फिल्मों से जुड़े रचनाकारों को भी शामिल कर लेता हूँ, क्योंकि फिल्मों में भी अनेक श्रेष्ठ रचनाकारों ने अपना योगदान दिया है| आज मैं छायावाद युग के एक स्तंभ रहे स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक रचना शेयर…

  • 19th Mar 2021

    आग पानी में लगाते हुए हालात की रात!

    पुराने फिल्मी गीतों को सुनकर यही खयाल आता है कि कितनी मेहनत करते थे गीतकार, संगीतकार और गायक भी उन गीतों की अदायगी में जैसे अपनी आत्मा को उंडेल देते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है, 1960 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘बरसात की रात’ के लिए रफ़ी साहब का गाया यह गीत, जिसे लिखा था साहिर…

  • 18th Mar 2021

    अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़!

    स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी बातचीत के लहजे में कविता लिखने के लिए प्रसिद्ध थे| उनके एक संकलन का नाम था ‘बुनी हुई रस्सी’, जिसका आशय है की वे कविता में रस्सी जैसी बुनावट की अपेक्षा रकहते थे| अपने मुंबई जाने के अनुभव को लेकर उन्होंने एक रचना लिखी थी- ‘जी हाँ हुज़ूर, मैं गीत…

  • 17th Mar 2021

    मेरा सूना पड़ा रे संगीत !

    मेरे प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ| आज का ये 1957 में रिलीज़ हुई फिल्म- रानी रूपमती के लिए पंडित भरत व्यास जी ने लिखा था और एस एन त्रिपाठी जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने इसे बड़े मनमोहक अंदाज़ में गाया है| लीजिए प्रस्तुत…

  • 16th Mar 2021

    प्यार से भीगा प्रकृति का गात साथी!

    स्वर्गीय भारत भूषण जी मेरे परम प्रिय कवि रहे हैं, कवि सम्मेलनों में उनका कविता पाठ सुनना, वास्तव में वहाँ जाने की क्रिया को सार्थक कर देता था| बहुत भाव-विभोर होकर वे सस्वर काव्य-पाठ करते थे| आज का भारत भूषण जी का यह गीत दर्शाता है कि किस प्रकार पूरे संयम और मर्यादा के साथ,…

  • 15th Mar 2021

    शाम आई-याद आई!

    लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है, एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- कविताओं और फिल्मी गीतों में शाम को अक्सर यादों से जोड़ा जाता है। यह खयाल आता है कि ऐसा क्या है, जिसके कारण शाम यादों से जुड़ जाती है! यहाँ दो गीत याद आते हैं जो शाम और यादों का संबंध दर्शाते हैं। एक गीत…

  • 14th Mar 2021

    एहसास का मारा दिल ही तो है!

    लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- कल एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर की थी| एक ही विषय पर लिखी ब्लॉग पोस्ट्स में से वह दूसरी थी| सोचता हूँ कि इस विषय पर साथ की अन्य पोस्ट भी शेयर कर लूँ| आज प्रस्तुत है उससे पहले लिखी गई पोस्ट| अगर यह…

  • 13th Mar 2021

    आखिर टूट जाता है!

    आज फिर से दिन है पुरानी पोस्ट का, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी पोस्ट- आज फिर दिल की बात होनी है, वैसे तो मैं समझता हूँ कि हर दिन इसी विषय पर बात की जा सकती है। एक गीत का मुखड़ा याद आ रहा है, ‘फिर वही दिल लाया हूँ’, जिस अंदाज़ में इसे रफी…

  • 12th Mar 2021

    मेरा बदन हो गया पत्थर का!

    स्वर्गीय रमेश रंजक जी मेरे प्रिय कवि रहे हैं, उनका स्नेह भी मिला मुझे और एक विशेषता थी उनमें कि यदि अच्छी रचना उनके शत्रु की भी हो तो उसकी तारीफ़ अवश्य करते थे| कम शब्दों में कैसे बड़ी बात कही जाए, यह उनकी रचनाओं में देखा जा सकता है| आज मैं रंजक जी का…

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