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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Apr 2021

    गीत ऋषि- देवेंद्र शर्मा ‘इंद्र’

    आज के समय में काव्य-लेखन को साधना का नाम देने का कोई औचित्य दिखाई नहीं देता| आज अधिकांश लोग लिखना शुरू करते हैं तो उनके सामने एक लक्ष्य होता है, वह मंच हो या किसी अन्य प्रकार से प्रकाशन-प्रसारण आदि के माध्यम से कमाई और ख्याति अर्जित करना| इन परिस्थितियों में स्वर्गीय देवेंद्र शर्मा ‘इंद्र’…

  • 1st Apr 2021

    Faith, Belief and Motivation!

    We humans are one of the millions of species that exist in the universe. We keep thinking about our life, aims and how to achieve our goals, how to succeed in life. Do we ever think whether other living beings also have some goals, dreams or aspirations in life and whether they are on the…

  • 30th Mar 2021

    थक गये हिरन चलते–चलते

    आज एक बार फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय कवि रहे स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| किशन जी को अनेक बार सुनने और अनेक बार उनसे मिलने का अवसर मिला, ये मेरा सौभाग्य था, अत्यंत सरल, सौम्य और शालीन व्यक्ति थे|  आज की रचना, में किशन सरोज जी…

  • 29th Mar 2021

    राजे ने अपनी रखवाली की!

    छायावाद युग के स्तंभ रहे महाकवियों की एक रचनाएं शेयर करने के क्रम में मैं आज स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| निराला जी अपने युग से बहुत आगे के कवि थे और उनकी रचना ‘राम की शक्तिपूजा’ एक कालजयी रचना है| निराला जी को उनकी उदारता और फक्कड़पन…

  • 28th Mar 2021

    बीती विभावरी जाग री!

    दो दिन पहले ही मैंने छायावाद युग के एक स्तंभ रहे स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक रचना शेयर की थी| आज इसी युग के एक और महाकवि जयशंकर प्रसाद जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| प्रसाद जी को उनके महाकाव्य- ‘कामायनी’ के लिए विशेष रूप से जाना जाता है| आज की इस…

  • 27th Mar 2021

    जो अपराधी नहीं होंगे, मारे जाएँगे!

    आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि श्री राजेश जोशी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ, रचना अपनी बात स्वयं कहती है, इसलिए मैं अलग से कुछ नहीं कहूँगा, कुल मिलाकर यह विपरीत स्थितियों का सामना स्वाभिमान और खुद्दारी के साथ करने का संदेश देने वाली रचना है| लीजिए आज प्रस्तुत है, श्री…

  • 26th Mar 2021

    ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| वसीम बरेलवी साहब की एक गज़ल याद आ रही है, बस उसके शेर एक-एक करके शेयर कर लेता हूँ। बड़ी सादगी के साथ बड़ी सुंदर बातें की हैं, वसीम साहब ने इस गज़ल में। पहला शेर तो वैसा ही है, जैसा हम कहते हैं, कोई बहुत…

  • 25th Mar 2021

    काले कपड़े पहने हुए सुबह देखी!

    कल मैंने अपने एक संस्मरण में, एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अन्य लोगों के साथ स्वर्गीय कुमार शिव जी को भी याद किया था और उनके एक-दो गीतों का उल्लेख किया था| आज उनको श्रद्धांजलि स्वरूप उनका एक पूरा गीत यहाँ दे रहा हूँ| इस गीत में उन्होंने अपनी खुद्दारी की प्रभावी अभिव्यक्ति…

  • 24th Mar 2021

    फ्यूज बल्बों के अद्भुद समारोह में!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- अपनी शुरू की ब्लॉग-पोस्ट्स में मैंने अपने जीवन के कुछ प्रसंगों, कुछ घटनाओं के बारे में लिखा था। आज जयपुर नगरी से जुड़ा एक बहुत पुराना प्रसंग दोहरा रहा हूँ। श्रेष्ठ नवगीतकार श्री कुमार शिव जी की मृत्यु का दुखद समाचार मिला, उनकी स्मृति में यह…

  • 23rd Mar 2021

    वो गुत्थी आज तक सुलझा रहा हूँ!

    आज उर्दू के उस्ताद शायर रहे ज़नाब फ़िराक़ गोरखपुरी साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| एक खास बात ये है की हिन्दी के प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी भी अंग्रेजी के प्रोफेसर थे और ज़नाब फ़िराक़ गोरखपुरी साहब भी| लीजिए आज प्रस्तुत है, फ़िराक़ गोरखपुरी साहब की ये खूबसूरत ग़ज़ल- सितारों…

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