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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Apr 2021

    वो दबदबा वो रौब-ए-हुकूमत कहाँ है आज!

    अली सरदार जाफ़री साहब का उर्दू अदब में एक अहम मुकाम है, उनको प्रतिष्ठित भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार तथा और अन्य अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए थे| भारतीय फिल्मों में भी उनकी अनेक रचनाओं को शामिल किया गया था| लीजिए प्रस्तुत है अली सरदार जाफ़री साहब की यह ग़ज़ल- एक जू-ए-दर्द दिल से जिगर तक रवाँ है…

  • 24th Apr 2021

    सूरज सोख न लेना पानी!

    डॉक्टर कुँवर बेचैन जी मेरे लिए गुरु तुल्य हैं, मैं भी कुछ समय उसी महाविद्यालय का छात्र रहा जिसमें वे प्रोफेसर थे| दिल्ली में रहते हुए कवि गोष्ठियों में तो उनसे भेंट होती ही रही, बाद में एक आयोजक की भूमिका निभाते हुए भी उनको कवि सम्मेलनों में आमंत्रित करने का सौभाग्य मुझे मिला| बहुत…

  • 23rd Apr 2021

    दिल सोगवार आज भी है!

    आज एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसकी विशेषता है गायक भूपिंदर सिंह की गूँजती आवाज| वैसे उन्होंने यह गीत 1985 में रिलीज़ हुई फिल्म- ऐतबार के लिए, भप्पी लाहिड़ी जी के संगीत निर्देशन में, आशा भोंसले जी के साथ मिलकर गाया है| इसके गीतकार हैं- हसन कमाल जी| लीजिए आज प्रस्तुत है ये गीत-…

  • 22nd Apr 2021

    इंसान की ख़ुश्बू आती है!

    भारतीय उपमहाद्वीप के एक अत्यंत लोकप्रिय शायर रहे क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| क़तील शिफ़ाई साहब पाकिस्तान के निवासी थे और उन्होंने अत्यंत खूबसूरत ग़ज़लें लिखी हैं जो बहुत लोकप्रिय हुई हैं और ग़ुलाम अली, जगजीत सिंह आदि प्रमुख गायकों ने उनको गाया है| लीजिए प्रस्तुत है क़तील शिफ़ाई…

  • 21st Apr 2021

    उसे तुम भी भूल जाओ!

    भारतीय उपमहाद्वीप के एक अत्यंत लोकप्रिय शायर रहे स्वर्गीय अहमद फ़राज़ साहब की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| अहमद फ़राज़ साहब पाकिस्तान के निवासी थे और उन्होंने अत्यंत खूबसूरत ग़ज़लें लिखी हैं जो बहुत लोकप्रिय हुईं और ग़ुलाम अली, जगजीत सिंह आदि प्रमुख गायकों ने उनको गाया है| लीजिए प्रस्तुत है अहमद फ़राज़…

  • 20th Apr 2021

    I am worried for God Almighty!

    Today I am going for the easier option, provided through #IndiSpire prompt for the week. The challenge is that we write a short story only in three lines. Now since the story has to be only in 3 lines, the introduction could be bigger! I am not sure whether the short story would be as…

  • 19th Apr 2021

    उनकी याद, उनकी तमन्ना, उनका ग़म!

    शकील बदायुनी साहब भारत के एक जाने–माने शायर थे और हिन्दी फिल्मों के लिए भी उन्होंने कुछ बहुत नायाब गीत लिखे हैं| उनका एक शेर तो मुझे अक्सर याद आता है- ‘जब चला ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का शकील, मुझको अपने दिल-ए-नाकाम पे रोना आया!’ लीजिए आज प्रस्तुत है शकील साहब की यह ग़ज़ल- सुब्ह…

  • 18th Apr 2021

    एक पूरा दिन!

    गुलज़ार साहब हमारे देश के बहुत सृजनशील और प्रयोगधर्मी रचनाकार हैं| जहां फिल्मी दुनिया को उन्होंने बहुत से नायाब गीत दिए हैं वहीं जगजीत सिंह जी जैसे ग़ज़ल गायकों ने भी उनकी अनेक रचनाओं को अपना स्वर दिया है| लीजिए आज प्रस्तुत है गुलज़ार साहब की यह नज़्म- मुझे खर्ची में पूरा एक दिन, हर…

  • 17th Apr 2021

    आज रात मैं लिख सकता हूँ!

    आज भी मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की जो मूलतः चिले से थे, की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई कविता, के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित मूल कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज…

  • 15th Apr 2021

    आग अब भी कहीं दबी-सी है!

    आज बिना किसी भूमिका के जावेद अख्तर साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| जावेद अख्तर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं और फिर कविता अपनी बात स्वयं कहती है| लीजिए प्रस्तुत है जावेद अख्तर साहब की यह ग़ज़ल- हर ख़ुशी में कोई कमी-सी है,हँसती आँखों में भी नमी-सी है| दिन भी चुपचाप सर…

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