-
जाने क्या हो गया सवेरों को!
आज फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| जीवन में बहुत तरह की परिस्थितियों, बहुत सी परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है, आज तो पूरी मानव-जाति को कोरोना की परीक्षा देनी पड़ी है और हमारे देश पर यह संकट इस समय कुछ अधिक ही…
-
दीवार की मरम्मत!
एक बार फिर से आज एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- दीवार की मरम्मत ऐसा कुछ है, जो दीवार को…
-
मोह मोह के धागे!
आज अपने एक मित्र और सहकर्मी के प्रसंग में बात करना चाहूँगा| ये मेरे साथी मेरे बॉस थे, परंतु उनसे बात करते हुए मुझे कभी यह लगा ही नहीं कि वो मेरे बॉस थे| वैसे इस तरह का अनुभव मेरा बहुत से लोगों के साथ रहा है, परंतु उन सबमें शायद ये सबसे सज्जन व्यक्ति…
-
भीगी पलकें न झुका!
आज मुझे मेरे प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत याद आ रहा है | फिल्म- साथी के लिए इस गीत को लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने और इसका संगीत दिया था- नौशाद साहब ने| कुल मिलाकर इस गीत में ऐसा दिव्य वातावरण तैयार होता है, ऐसा लगता है की…
-
जिस दिन अपने जूड़े में ,उसने कुछ फूल सजाये थे!
लीजिए एक बार फिर से जनाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल का आनंद लेते हैं| जैसा कि आप जानते ही हैं क़तील साहब भारतीय उपमहाद्वीप के एक महान शायर थे और अनेक प्रसिद्ध गायकों ने उनकी ग़ज़लों आदि को अपना स्वर दिया है| यह भी क़तील साहब की अलग किस्म की ग़ज़ल है, हमारे…
-
तुम बाद-ए-सबा कहलाओ तो क्या!
आज फिर से एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसे लिखा है ‘ओबेदुल्लाह अलीम’ साहब ने और ग़ुलाम अली साहब ने गाया है| ग़ुलाम अली साहब का एक प्रसंग याद आ रहा है, मेरे बच्चों को मालूम है कि मुझे ग़ुलाम अली जी बहुत पसंद हैं, तो बेटे ने सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में…
-
नींद सूरज-सितारों को आने लगे!
वक़्त भी क्या-क्या चालें चलता है, आज तो देश और दुनिया के लिए मानो परीक्षा की घड़ी है| वक़्त की इस चाल की चिंता तो हम सभी को करनी है और करनी भी पड़ेगी, लेकिन यहाँ मैं इससे अलग जाते हुए नायिका की चाल, चालबाजी नहीं जी, सिर्फ ‘चाल’, उसके चलने के अंदाज़ के बारे…
-
दर्द के नाम से वाक़िफ़ न जहां हो कोई !
आज एक गीत याद आ रहा है, फिल्म- ‘नई रोशनी’ से, यह गीत मोहम्मद रफ़ी साहब ने फिल्म अभिनेता- स्वर्गीय राज कुमार जी के लिए गाया है| राज कुमार जी नशे की एक्टिंग काफी अच्छी करते थे| उनका ‘वक़्त’ फिल्म का एक संवाद बहुत प्रसिद्ध है- ‘जिनके घर शीशे के हों, वो दूसरे के घर…
-
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी!
आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं।आज फिर से जीवन का एक पुराना पृष्ठ, कुछ पुरानी यादें, एक पुराना ब्लॉग! जयपुर पहुंच गए लेकिन काफी कुछ पीछे छूट गया। मेरी मां,…
-
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ !
एक बार फिर से आज जनाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| क़तील साहब भारतीय के एक अत्यंत लोकप्रिय शायर रहे हैं| उनकी इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी ने भी गाया है| कवि/शायरों की कैसी-कैसी ख्वाहिशें होती हैं, जैसे इस ग़ज़ल में ही क़तील साहब ने कुछ बेहतरीन ख़्वाहिशों का…