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कौवों ने खुजलाईं पांखें, कई दिनों के बाद!
बंगाल के चुनाव परिणामों को लेकर कुछ कहने का मन हो रहा है| कल देखा कि राजदीप सरदेसाई बहुत दिनों के बाद, अपनी दीदी के बंगाल चुनावों में विजयी होने के उपलक्ष्य में प्रसन्नचित्त होकर उनका इंटरव्यू ले रहे थे| बहुत दिनों के बाद ऐसा मौका आता है जब राजदीप, बरखा दत्त, रवीश कुमार, विनोद…
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सोच समझवालों को थोड़ी नादानी दे मौला!
आज फिर से मैं अपने एक अत्यंत प्रिय शायर रहे स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली साहब की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| निदा साहब ने गीत, ग़ज़ल, दोहे- हर विधा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और उनमें जो कबीर साहब जैसी साफ़गोई और फक्कड़पन दिखाई देता है, वह आज के समय में दुर्लभ है|…
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तेरी मेहंदी लेकर दिन उगा!
नीरज जी हिन्दी साहित्यिक मंचों के अत्यंत सुरीले और सृजनशील गीतकार थे, जिन्होंने फिल्म जगत में भी अपना विशेष स्थान बनाया था| आज नीरज जी का लिखा एक मस्ती भरा फिल्मी गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म- शर्मीली के लिए सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार…
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यूं ही ना तोड़ अभी बीन रे सपेरे!
आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| अपनी शुरू की ब्लॉग पोस्ट्स में, मैंने अपनी जीवन यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों का ज़िक्र किया था, आज उनमें से ही एक पोस्ट को दोहरा रहा हूँ, क्योंकि इसमें आदरणीय बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक प्यारा सा…
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अपने शहर का रास्ता!
आज फिर से अपने एक पुराने कवि-मित्र को याद कर रहा हूँ| उनके बारे में एक बात यह भी कि मैथिली शरण गुप्त जी शायद उनके नाना थे, या शायद दादा रहे हों, यह ठीक से याद नहीं, वैसे यह रिश्ता महत्वपूर्ण भी नहीं है, ऐसे ही याद आ गया| हाँ तो मेरे यह मित्र…
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मैं तेरी ही रुबाई हूँ!
आज ही समाचार मिला कि कवि सम्मेलनों को अपनी सृजनशील और सुरीली प्रस्तुतियों से गरिमा प्रदान करने वाले डॉक्टर कुँवर बेचैन नहीं रहे| मैं उनको श्रद्धांजलि स्वरूप, अपनी पुरानी ब्लॉग पोस्ट्स से उनकी दो रचनाएँ पुनः प्रस्तुत कर रहा हूँ| डॉ कुँवर बेचैन जी मेरे अग्रजों में रहे हैं, उनके दो गीत आज शेयर कर…
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गति,अगति, सद्गति!
आज का समय मानव जाति के लिए बड़ा कठिन है, खास तौर पर कोरोना की यह दूसरी लहर भारतवर्ष के लिए बड़े कष्ट लेकर आई है| पहली लहर के समय हम कहते थे कि बाहर से लोगों को क्यों आने दे रहे हैं! आज दूसरे अनेक देश भारत से लोगों का वहाँ जाना प्रतिबंधित कर…
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टूटा नहीं दिल ये अभी!
आज मैं फिर से अपने प्रिय गायक मुकेश जी का एक खूबसूरत गीत शेयर कर रहा हूँ| फिल्म-दूल्हा-दुल्हन के लिए यह गीत राज कपूर जी पर फिल्माया गया था, गीत के लेखक थे- इंदीवर और संगीतकार थे – कल्याणजी-आनंदजी|वैसे भी मुकेश जी उदासी भरे नग़मों के शहंशाह माने जाते हैं, हालांकि उन्होंने मस्ती भरे गीत…
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मैं जहां भी जाऊंगा, उसको पता हो जाएगा !!
आज डॉक्टर बशीर बद्र साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह और अन्य गायक कलाकारों ने भी गाया है| बद्र साहब अपनी नायाब एक्स्प्रेशन और भाषिक प्रयोगों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है डॉक्टर बशीर बद्र साहब की ये बेहतरीन ग़ज़ल- सर झुकाओगे तो पत्थर…
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मिला विहान को नया सृजन!
आज शुद्ध और बेलौस प्रेम के कवि स्वर्गीय रामानन्द दोषी जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| दोषी जी की प्रेम के अभिव्यक्ति अलग ही किस्म की होती थी, उनका प्रसिद्ध गीत है- ‘मन होता है पारा, ऐसे देखा नहीं करो’! काव्य लेखन के अलावा दोषी जी ने कई पत्रिकाओं का संपादन किया, जिनमें…