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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Jun 2021

    A wax doll, walking in Hot Desert!

    A question have been asked in #IndiSpire this time, in response to which we have to tell- which is our favourite poem and why! I have mainly been a reader of Hindi literature and poetry, though I have read and translated various English poems of Wordsworth, Tagore and many more poets and shared them through…

  • 6th Jun 2021

    दूसरा बनवास !

    कैफ़ी आज़मी साहब हमारे देश के ऐसे मशहूर शायरों में शामिल थे, जिनका नाम शायरी की दुनिया में बहुत आदर के साथ लिया जाता है| आज उनकी जो नज़्म मैं शेयर कर रहा हूँ उसमें उन्होंने बताया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी यदि बाबरी मस्जिद का गिराया जाना देखते तो उनको कैसा महसूस होता|…

  • 5th Jun 2021

    कहीं चलो ना, जी !

    आज स्वर्गीय कैलाश गौतम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अपने संस्थान में कवि सम्मेलनों का आयोजन करते-करते कैलाश जी से अच्छी मित्रता हो गई थी, बहुत सरल हृदय व्यक्ति थे| उनकी रचनाएँ जो बहुत प्रसिद्ध थीं, उनमें ‘अमौस्या का मेला’ और ‘कचहरी’ – ‘भले डांट घर में तू बीवी की खाना, भले…

  • 4th Jun 2021

    ऐसे हिज्र के मौसम अब कब आते हैं!

    शहरयार जी भारतवर्ष के एक नामी शायर रहे हैं, जिनके गीतों ने फिल्मों में भी स्थान पाया और प्रसिद्ध गजल गायकों ने भी उनकी ग़ज़लों को गाया है| लीजिए आज प्रस्तुत है शहरयार जी की यह ग़ज़ल- ऐसे हिज्र के मौसम अब कब आते हैं,तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं| जज़्ब करे क्यों रेत…

  • 3rd Jun 2021

    लो दिन बीता, लो रात गई!

    किसी जमाने में हिन्दी कवि सम्मेलनों में धूम मचाने वाले स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी सरल भाषा में बड़ी प्रभावी अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध थे| उनकी मधुशाला के लिए तो लोग दीवाने हो जाते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है बच्चन जी का यह गीत- सूरज…

  • 2nd Jun 2021

    सर्दी की रात में सैर !

    आज फिर से बारी है पुरानी ब्लॉग पोस्ट की| आज मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- सर्दियों में शाम की सैर के लिए-कोई नहीं था मेरे साथ, जिससे कर सकूं…

  • 1st Jun 2021

    बड़ी दूर तक रात ही रात होगी!

    डॉ बशीर बद्र जी आज की उर्दू शायरी की पहचान बनाने वाले प्रमुख शायरों में से एक हैं। उनके कुछ शेर तो जैसे मुहावरा बन गए हैं| जैसे आज की ग़ज़ल का एक शेर भी अक्सर दोहराया जाता है- ‘मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी,किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी’| डॉ बशीर बद्र…

  • 31st May 2021

    मैं एक तड़पता क़तरा हूँ!

    अली सरदार जाफ़री साहब की एक लंबी कविता या कहें की नज़्म आज शेयर कर रहा हूँ| अली सरदार जाफ़री साहब बहुत विख्यात शायर थे और हिन्दी फिल्मों में भी उनकी अनेक रचनाओं का सदुपयोग किया गया है| आज की इस रचना में अली सरदार जाफ़री साहब ने ज़िंदगी के बारे में, खुलकर अपने विचार…

  • 30th May 2021

    आँख बच्ची की पनीली है!

    आज अदम गोंडवी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| ठेठ देहाती अंदाज़ में आम जनता के जीवन की सच्चाइयों को अदम गोंडवी जी ने बड़े सलीके के साथ बेबाक़ी के साथ अभिव्यक्त किया है| लीजिए आज अदम गोंडवी जी की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली…

  • 29th May 2021

    जीना न हो हराम, चलो मयकदे चलें!

    ज़नाब कृष्ण बिहारी ‘नूर’ साहब की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| ‘नूर’ साहब उस समय शायरी के क्षेत्र में सक्रिय गिने-चुने हिन्दू शायरों में से एक थे| कई बार ऐसी प्रतियोगिता भी होती थीं, जिनमें एक मिसरे को लेकर ग़ज़ल के शेर लिखने को कहा जाता था| एक बार ग़ज़ल लिखने के लिए…

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