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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Jun 2021

    मटरू का आना और जाना!

    मटरू का पता ही नहीं चलता कि कब वो हमारे, मतलब अपने घर में रहेगा और कब बाहर चला जाएगा| एक तरह से देखा जाए तो उसको आवारा कहा जा सकता है, कभी वो रात में अपने स्थान पर सोता है और सुबह होते ही चला जाता है, और कभी रात भर गायब रहता है…

  • 26th Jun 2021

    गीत भी कहीं न सो जाए!

    आज मैं स्वर्गीय अज्ञेय जी द्वारा संपादित- काव्य संकलन- तारसप्तक में सम्मिलित प्रमुख कवि- स्वर्गीय गिरिजा कुमार माथुर जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| तारसप्तक हिन्दी कविता की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज था| लीजिए प्रस्तुत है गिरिजाकुमार माथुर जी का यह गीत – इतना मत दूर रहोगंध कहीं खो जाएआने दो…

  • 25th Jun 2021

    सदा खुश रहे तू !

    आज मैं फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत 1961 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘प्यार का सागर’ के लिए मुकेश जी ने रवि जी के संगीत निर्देशन में गाया था,इस गीत के रचनाकार थे प्रेम धवन जी| लीजिए प्रस्तुत है यह गीत, जो इतना…

  • 24th Jun 2021

    याद केवल आदेश!

    आज फिर से मैं अपने बहुत प्रिय गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मेरा सौभाग्य है कि मुझे अनेक बार उनका स्नेह और सानिध्य प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ था| आज के गीत में उन्होंने बताया है कि जब व्यक्ति दफ्तर के रूटीन के हवाले हो जाता है,…

  • 23rd Jun 2021

    छोड़ जाएंगे ये जहां तन्हा !

    विख्यात फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी जी एक अच्छी शायरा भी थीं और कविता की कद्रदान भी थीं| वास्तव मेँ कवि नीरज जी को फिल्मी दुनिया मेँ ले जाने वाली भी वही थीं | आज मैं मीना कुमारी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ-, प्रस्तुत है यह ग़ज़ल- चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा,दिल मिला…

  • 22nd Jun 2021

    Writing and Re-writing of History!

    It’s true that image creation for self is what the rulers like the most. For this they have been using the writers and historians also. Till now the job of image creation, writing in favour of those in power was in the hands of some communist authors, historians etc. who did, whatever suited to those…

  • 21st Jun 2021

    मुझको ये वहम नहीं है कि खु़दा है मुझमें !

    अभिव्यक्ति की- गीत, कविता, शायरी की दुनिया कितनी व्यापक है, ज़िंदगी के कितने रंग हम इसमें देख सकते हैं, यह वास्तव में अद्वितीय है| इसी क्रम में आज मैं राजेश रेड्डी जी की एक और ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है, श्री राजेश रेड्डी जी की यह ग़ज़ल- आग है, पानी है,…

  • 20th Jun 2021

    पिता के नाम

    आज फिर से अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट संपादित रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ| यद्यपि इसे प्रस्तुत करने मेँ थोड़ी देरी हो गई है| पितृ दिवस के अवसर पर, मैं अपने पूज्य पिताजी का स्मरण करते हुए इस पोस्ट को शेयर कर रहा हूँ, जिनके पास उपलब्धियों के नाम पर कुछ बताने लायक नहीं…

  • 20th Jun 2021

    रहम जब अपने पे आता है तो हंस लेता हूँ!

    आज पुरानी फिल्म- किनारे-किनारे के लिए मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत लिखा है न्याय शर्मा जी ने और इसका संगीत दिया है जयदेव जी ने| यह जीवन बहुत जटिल है| कभी-कभी ऐसी स्थितियाँ बन जाती हैं कि किस बात पर हंसा जाए और किस बात पर रोया जाए…

  • 19th Jun 2021

    प्रेम गीतिका

    आज फिर से मैं एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| आज भी मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको…

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