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ये बेगारी किया करो!
रोज़ क़सीदे लिक्खो गूँगे बहरों के, फ़ुर्सत हो तो ये बेगारी किया करो| राहत इंदौरी
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उत्खनन!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के शलाका-पुरुष स्वर्गीय शंभूनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय शंभूनाथ जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभूनाथ सिंह जी का यह नवगीत – उत्खनन किया है मैंने गहराई तक अतीत का । सिन्धु-सभ्यता से…
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नमकीन कहा है मैंने!
ज़ाइक़े बारहा आँखों में मज़ा देते हैं, बाज़ चेहरों को भी नमकीन कहा है मैंने| राहत इंदौरी
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चील कव्वों को भी!
मस्लहत कहिए उसे या कि सियासत कहिए, चील कव्वों को भी शाहीन कहा है मैंने| राहत इंदौरी
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आमीन कहा है मैंने!
काली रातों को भी रंगीन कहा है मैंने, तेरी हर बात पे आमीन कहा है मैंने| राहत इंदौरी