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नमकीन कहा है मैंने!
ज़ाइक़े बारहा आँखों में मज़ा देते हैं, बाज़ चेहरों को भी नमकीन कहा है मैंने| राहत इंदौरी
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चील कव्वों को भी!
मस्लहत कहिए उसे या कि सियासत कहिए, चील कव्वों को भी शाहीन कहा है मैंने| राहत इंदौरी
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आमीन कहा है मैंने!
काली रातों को भी रंगीन कहा है मैंने, तेरी हर बात पे आमीन कहा है मैंने| राहत इंदौरी
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फिर से गूंज उठी रणभेरी!
आज एक बार फिर मैं किसी जमाने में मंचों पर अपने गीतों से धूम मचाने वाले विख्यात कवि स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंग जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत –…