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जीवन से ले गया वो!
अब क्या है अर्थ-हीन सी पुस्तक है ज़िंदगी, जीवन से ले गया वो कई दिन निकाल के| कृष्ण बिहारी नूर
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मौसम दो ही इश्क़ के!
मौसम हैं दो ही इश्क़ के सूरत कोई भी हो, हैं उस के पास आइने हिज्र-ओ-विसाल के| कृष्ण बिहारी नूर
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गिरे ताड़ से!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी नवगीत कवि नचिकेता जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी रचनाएं शायद मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है नचिकेता जी का यह नवगीत- गिरे ताड़ सेमगर बीच में हीखजूर पर हम अँटके।घर की झोल लगी दीवारों पर हैंचमगादड़ लटकेखूस गए हैं काठधरन, ओलती, दरवाज़े,चौखट केऔर…
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सौदा जो करना!
पिछले जन्म की गाढ़ी कमाई है ज़िंदगी, सौदा जो करना करना बहुत देख-भाल के| कृष्ण बिहारी नूर
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ऐ मेरी आरज़ू मुझे!
ऐसा न हो गुनाह की दलदल में जा फँसूँ, ऐ मेरी आरज़ू मुझे ले चल सँभाल के| कृष्ण बिहारी नूर
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लफ़्ज़ों के ये नगीने!
लफ़्ज़ों के ये नगीने तो निकले कमाल के, ग़ज़लों ने ख़ुद पहन लिए ज़ेवर ख़याल के| कृष्ण बिहारी नूर
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पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी रचनाएं शायद मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता- इसी जन्म में,इस जीवन में,हमको तुमको मान मिलेगा।गीतों की खेती करने को,पूरा हिन्दुस्तान मिलेगा। क्लेश जहाँ है,फूल खिलेगा,हमको तुमको…
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गीतों का बेवपार किया
देश से जब प्रदेश सिधारे हम पर ये भी वक़्त पड़ा, नज़्में छोड़ी ग़ज़लें छोड़ी गीतों का बेवपार किया| जाँ निसार अख़्तर