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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Jul 2024

    ख़ाका तय्यार किया!

    अब तुम सोचो अब तुम जानो जो चाहो अब रंग भरो, हम ने तो इक नक़्शा खींचा इक ख़ाका तय्यार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 7th Jul 2024

    दिल का कारोबार!

    इश्क़ में क्या नुक़सान नफ़ा है हम को क्या समझाते हो, हम ने सारी उम्र ही यारो दिल का कारोबार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 7th Jul 2024

    दौरे भी तन्हाई के!

    हम पर कितनी बार पड़े ये दौरे भी तन्हाई के, जो भी हम से मिलने आया मिलने से इंकार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 7th Jul 2024

    शक्ल दिखाई तब!

    क़तरा क़तरा सिर्फ़ हुआ है इश्क़ में अपने दिल का लहू, शक्ल दिखाई तब उस ने जब आँखों को ख़ूँ-बार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 7th Jul 2024

    किसने ये बीमार किया

    जाते जाते कोई हम से अच्छे रहना कह तो गया, पूछे लेकिन पूछने वाले किस ने ये बीमार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 7th Jul 2024

    तेरी सोई आँखों ने तो!

    पहले भी ख़ुश-चश्मों में हम चौकन्ना से रहते थे, तेरी सोई आँखों ने तो और हमें होशियार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 7th Jul 2024

    जितने भी बदनाम हुए!

    मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया, जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 7th Jul 2024

    उनको प्रणाम!

    आज एक बार फिर मैं जनकवि बाबा नागार्जुन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नागार्जुन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता-   जो नहीं हो सके पूर्ण–काममैं उनको करता हूँ प्रणाम । कुछ कंठित औ’ कुछ लक्ष्य–भ्रष्टजिनके अभिमंत्रित तीर हुए;रण…

  • 6th Jul 2024

    कोई सूरज मिरे!

    लम्हा लम्हा रहे आँखों में अँधेरे लेकिन, कोई सूरज मिरे सीने में उभरता ही रहा| जाँ निसार अख़्तर

  • 6th Jul 2024

    शहर दर शहर मैं!

    मिट गया पर तिरी बाँहों ने समेटा न मुझे, शहर दर शहर मैं गलियों में बिखरता ही रहा| जाँ निसार अख़्तर

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