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यूँ याद तिरी शब भर!
लोबान में चिंगारी जैसे कोई रख जाए, यूँ याद तिरी शब भर सीने में सुलगती है| बशीर बद्र
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सद्भावना गीत!
आज एक बार फिर मैं आज के लोकप्रिय हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी द्वारा लिखा गया सद्भावना गीत शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी का यह गीत – गूंजे गगन में,महके…
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चिलमन सी सरकती है!
जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है, यादों के दरीचों में चिलमन सी सरकती है| बशीर बद्र
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मेरे लिए जगह करो!
मेरी नशिस्त* पे भी कल आएगा कोई दूसरा, तुम भी बना के रास्ता मेरे लिए जगह करो| *बैठक निदा फ़ाज़ली
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सज लिया करो!
देखो ये शहर है अजब दिल भी नहीं है कम ग़ज़ब, शाम को घर जो आऊँ मैं थोड़ा सा सज लिया करो| निदा फ़ाज़ली
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उसके लिए दुआ करो!
शोहरत भी उस के साथ है दौलत भी उस के हाथ है, ख़ुद से भी वो मिले कभी उसके लिए दुआ करो| निदा फ़ाज़ली
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वैभव के अमिट चरण चिह्न!
आज एक बार फिर मैं हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री रहे, कवि हृदय भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अटल जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रस्तुत है स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी…
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घर में ख़ुदा ख़ुदा करो!
अच्छी नहीं ये ख़ामुशी शिकवा करो गिला करो, यूँ भी न कर सको तो फिर घर में ख़ुदा ख़ुदा करो| निदा फ़ाज़ली
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जीते जाओ सोचो मत!
घूम रहे हैं बाज़ारों में सरमायों के आतिश-दान, किस भट्टी में कौन ईंधन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली