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जैसा मालिक रक्खे!
हर मज़हब का एक ही कहना जैसा मालिक रक्खे रहना, जब तक साँसों का बंधन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली
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नाच सको तो नाचो!
नाच सको तो नाचो जब थक जाओ तो आराम करो, टेढ़ा क्यूँ घर का आँगन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली
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लिखा हुआ किरदार!
लिखा हुआ किरदार कहानी में ही चलता फिरता है, कभी है दूरी कभी मिलन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली
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जीते जाओ सोचो मत!
कठ-पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत, सोच से ही सारी उलझन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली
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आ जाना प्रिय आ जाना!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य के एक महान सृजक, सभी विधाओं में अपना अमूल्य योगदान करने वाले स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है अज्ञेय जी की यह कविता –…
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छन रहा है नूर सा!
कुछ क़फ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा, कुछ फ़ज़ा कुछ हसरत-ए-परवाज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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नाम भी लेना है!
नाम भी लेना है जिसका इक जहान-ए-रंग-ओ-बू, दोस्तो उस नौ-बहार-ए-नाज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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दिल की रगों का टूटना
ये सुकूत-ए-नाज़ ये दिल की रगों का टूटना, ख़ामुशी में कुछ शिकस्त-ए-साज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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राज़ की बातें करो!
शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो, बे-ख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी