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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Dec 2023

    कुछ मैल तो बदन का!

    ऐ आँसुओ तुम्हारी ज़रूरत है अब मुझे, कुछ मैल तो बदन का नहाने से कट गया|              मुनव्वर राना

  • 31st Dec 2023

    घराने से कट गया!

    जोड़े की शान बढ़ गई महफ़िल महक उठी, लेकिन ये फूल अपने घराने से कट गया|             मुनव्वर राना

  • 31st Dec 2023

    मैं आज अपने!

    माँ आज मुझ को छोड़ के गाँव चली गई, मैं आज अपने आईना-ख़ाने से कट गया|            

  • 31st Dec 2023

    ज़माने से कट गया!

    ये सर-बुलंद होते ही शाने से कट गया, मैं मोहतरम हुआ तो ज़माने से कट गया|             मुनव्वर राना

  • 31st Dec 2023

    अनाम!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में अपना अमूल्य योगदान करने वाले तथा धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ|  भारती जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी…

  • 30th Dec 2023

    शेर कभी ख़ुद पर भी!

    काग़ज़ को सब सौंप दिया ये ठीक नहीं, शेर कभी ख़ुद पर भी तारी किया करो|                  राहत इंदौरी

  • 30th Dec 2023

    कोशिश ज़िंदा रहने की

    रोज़ वही इक कोशिश ज़िंदा रहने की, मरने की भी कुछ तय्यारी किया करो|            राहत इंदौरी

  • 30th Dec 2023

    ख़ूब सवारी किया करो!

    रात बदन-दरिया में रोज़ उतरती है, इस कश्ती में ख़ूब सवारी किया करो|             राहत इंदौरी

  • 30th Dec 2023

    बातें प्यारी प्यारी!

    जब जी चाहे मौत बिछा दो बस्ती में, लेकिन बातें प्यारी प्यारी किया करो|            राहत इंदौरी

  • 30th Dec 2023

    रौशन है तो रहने दो!

    चाँद ज़ियादा रौशन है तो रहने दो, जुगनू-भय्या जी मत भारी किया करो|            राहत इंदौरी

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