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कुछ मैल तो बदन का!
ऐ आँसुओ तुम्हारी ज़रूरत है अब मुझे, कुछ मैल तो बदन का नहाने से कट गया| मुनव्वर राना
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घराने से कट गया!
जोड़े की शान बढ़ गई महफ़िल महक उठी, लेकिन ये फूल अपने घराने से कट गया| मुनव्वर राना
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ज़माने से कट गया!
ये सर-बुलंद होते ही शाने से कट गया, मैं मोहतरम हुआ तो ज़माने से कट गया| मुनव्वर राना
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अनाम!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में अपना अमूल्य योगदान करने वाले तथा धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| भारती जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी…
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बातें प्यारी प्यारी!
जब जी चाहे मौत बिछा दो बस्ती में, लेकिन बातें प्यारी प्यारी किया करो| राहत इंदौरी