तुमसे दूरी, ये मजबूरी!

तुम से दूरी, ये मजबूरी, ज़ख़्म-ए-कारी, बेदारी,

तन्हा रातें, सपने क़ातें, ख़ुद से बातें, मेरी ख़ू|

              जावेद अख़्तर

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