फूल बिछौना, वो पहलू!

रातें महकी, साँसें दहकी, नज़रें बहकी, रुत लहकी,

सप्न सलोना, प्रेम खिलौना, फूल बिछौना, वो पहलू|

                जावेद अख़्तर

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