रातें महकी, साँसें दहकी, नज़रें बहकी, रुत लहकी,
सप्न सलोना, प्रेम खिलौना, फूल बिछौना, वो पहलू|
जावेद अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds
रातें महकी, साँसें दहकी, नज़रें बहकी, रुत लहकी,
सप्न सलोना, प्रेम खिलौना, फूल बिछौना, वो पहलू|
जावेद अख़्तर
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