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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Feb 2024

    आस्तीं पे लहू नहीं!

    कहीं चाक-ए-जाँ का रफ़ू नहीं किसी आस्तीं पे लहू नहीं, कि शहीद-ए-राह-ए-मलाल का नहीं ख़ूँ-बहा उसे भूल जा|                    अमजद इस्लाम अमजद

  • 14th Feb 2024

    मुस्कुरा उसे भूल जा!

    किसी आँख में नहीं अश्क-ए-ग़म तिरे बअ‘द कुछ भी नहीं है कम, तुझे ज़िंदगी ने भुला दिया तू भी मुस्कुरा उसे भूल जा|                  अमजद इस्लाम अमजद                  

  • 14th Feb 2024

    तिरी आस तेरे गुमान में

    मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में तिरी आस तेरे गुमान में, सबा कह गई मिरे कान में मिरे साथ आ उसे भूल जा|                 अमजद इस्लाम अमजद

  • 14th Feb 2024

    भूल जा उसे भूल जा!

    वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं, दिल-ए-बे-ख़बर मिरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा|                  अमजद इस्लाम अमजद

  • 14th Feb 2024

    असमंजस!

    आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के वरिष्ठ कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी की एक कविता पूर्व प्रधान मंत्री वाजपेयी जी अक्सर दोहराते थे- ‘हार में न जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं, संघर्ष पथ में जो मिला, यह भी सही वह भी सही’|…

  • 13th Feb 2024

    नहीं मिला उसे भूल जा

    कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा, वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा|                   अमजद इस्लाम अमजद

  • 13th Feb 2024

    इतना अंधेरा कैसे!

    ज़ुल्फ़ें चेहरे से हटा लो कि हटा दूँ मैं ख़ुद, ‘नूर’ के होते हुए इतना अंधेरा कैसे|               कृष्ण बिहारी नूर

  • 13th Feb 2024

    लिखूँ तेरा सरापा कैसे!

    आँख जिस जा पे भी पड़ती है ठहर जाती है, लिखना चाहूँ तो लिखूँ तेरा सरापा कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 13th Feb 2024

    तेरी राहों में मिरे!

    इस जनम में तो कभी मैं न उधर से गुज़रा, तेरी राहों में मिरे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 13th Feb 2024

    बज़्म में तन्हा कैसे!

    आप भी अहल-ए-ख़िरद* अहल-ए-जुनूँ** थे मौजूद, लुट गए हम भी तिरी बज़्म में तन्हा कैसे| *बुद्धिमत्ता, **जोश             कृष्ण बिहारी नूर

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