कहीं चाक-ए-जाँ का रफ़ू नहीं किसी आस्तीं पे लहू नहीं,
कि शहीद-ए-राह-ए-मलाल का नहीं ख़ूँ-बहा उसे भूल जा|
अमजद इस्लाम अमजद
A sky full of cotton beads like clouds
कहीं चाक-ए-जाँ का रफ़ू नहीं किसी आस्तीं पे लहू नहीं,
कि शहीद-ए-राह-ए-मलाल का नहीं ख़ूँ-बहा उसे भूल जा|
अमजद इस्लाम अमजद
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