क्यूँ अटा हुआ है ग़ुबार में ग़म-ए-ज़िंदगी के फ़िशार में,
वो जो दर्द था तिरे बख़्त* में सो वो हो गया उसे भूल जा|
*भाग्य
अमजद इस्लाम अमजद
A sky full of cotton beads like clouds
क्यूँ अटा हुआ है ग़ुबार में ग़म-ए-ज़िंदगी के फ़िशार में,
वो जो दर्द था तिरे बख़्त* में सो वो हो गया उसे भूल जा|
*भाग्य
अमजद इस्लाम अमजद
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