तुझे चाँद बन के मिला था जो तिरे साहिलों पे खिला था जो,
वो था एक दरिया विसाल का सो उतर गया उसे भूल जा|
अमजद इस्लाम अमजद
A sky full of cotton beads like clouds
तुझे चाँद बन के मिला था जो तिरे साहिलों पे खिला था जो,
वो था एक दरिया विसाल का सो उतर गया उसे भूल जा|
अमजद इस्लाम अमजद
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