बज़्म में तन्हा कैसे!

आप भी अहल-ए-ख़िरद* अहल-ए-जुनूँ** थे मौजूद,

लुट गए हम भी तिरी बज़्म में तन्हा कैसे|

*बुद्धिमत्ता, **जोश

            कृष्ण बिहारी नूर

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