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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Feb 2024

    जाने किधर गया वो!

    वो रात का बे-नवा मुसाफ़िर वो तेरा शाइर वो तेरा ‘नासिर’, तिरी गली तक तो हम ने देखा था फिर न जाने किधर गया वो|                         नासिर काज़मी  

  • 11th Feb 2024

    सर झुकाए गुज़र गया

    वो जिस के शाने पे हाथ रख कर सफ़र किया तू ने मंज़िलों का, तिरी गली से न जाने क्यूँ आज सर झुकाए गुज़र गया वो|                   नासिर काज़मी  

  • 11th Feb 2024

    कल रात मर गया वो!

    वो हिज्र की रात का सितारा वो हम-नफ़स हम-सुख़न हमारा, सदा रहे उस का नाम प्यारा सुना है कल रात मर गया वो|                     नासिर काज़मी   

  • 11th Feb 2024

    नींद उड़ाने वाला!

    वो मय-कदे को जगाने वाला वो रात की नींद उड़ाने वाला, ये आज क्या उस के जी में आई कि शाम होते ही घर गया वो|                    नासिर काज़मी 

  • 11th Feb 2024

    क्यूँ बे-असर गया वो!

    मिरा तू ख़ूँ हो गया है पानी सितमगरों की पलक न भीगी, जो नाला उट्ठा था रात दिल से न जाने क्यूँ बे-असर गया वो|                  नासिर काज़मी

  • 11th Feb 2024

    गए दिनों को बुला रहा

    शिकस्ता-पा राह में खड़ा हूँ गए दिनों को बुला रहा हूँ, जो क़ाफ़िला मेरा हम-सफ़र था मिसाल-ए-गर्द-ए-सफ़र गया वो|                      नासिर काज़मी

  • 11th Feb 2024

    झूम रहीं बालियां!

    आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अशोक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता – रे देखो खेतों में झूम…

  • 10th Feb 2024

    ठहर गया वो!

    बस एक मंज़िल है बुल-हवस की हज़ार रस्ते हैं अहल-ए-दिल के, यही तो है फ़र्क़ मुझ में उस में गुज़र गया मैं ठहर गया वो|                    नासिर काज़मी  

  • 10th Feb 2024

    सँभलने लगी है जाँ भी!

    कुछ अब सँभलने लगी है जाँ भी बदल चला दौर-ए-आसमाँ भी, जो रात भारी थी टल गई है जो दिन कड़ा था गुज़र गया वो|                    नासिर काज़मी  

  • 10th Feb 2024

    जो ज़ख़्म गहरा था!

    न अब वो यादों का चढ़ता दरिया न फ़ुर्सतों की उदास बरखा, यूँही ज़रा सी कसक है दिल में जो ज़ख़्म गहरा था भर गया वो|                     नासिर काज़मी  

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