-
वो दावा किधर गया!
तुमसे न मिल के ख़ुश हैं वो दावा किधर गया, दो रोज़ में गुलाब सा चेहरा उतर गया| कैफ़ भोपाली
-
ओस-नहाई रात!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| कुँवर नारायण जी को अज्ञेय जी ने अपने संपादन में प्रकाशित तीसरा सप्तक में भी सम्मिलित किया था| कुँवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…
-
तू ने शिकवा कर दिया!
वो घर आए थे ‘नज़ीर’ ऐसे में कुछ कहना न था, शुक्र का मौक़ा था प्यारे तू ने शिकवा कर दिया| नज़ीर बनारसी
-
उठ के पर्दा कर दिया!
मोहतरम पी लीजिए मौसम ने मौक़ा दे दिया, देखिए काली घटा ने उठ के पर्दा कर दिया| नज़ीर बनारसी
-
हश्र बरपा कर दिया!
बंदगान-ए-दौर-ए-हाज़िर की ख़ुदाई देखिए, जिस जगह जिस वक़्त चाहा हश्र बरपा कर दिया| नज़ीर बनारसी
-
समझाने भी आए!
आप समझाने भी आए क़िबला-ओ-काबा तो कब, इश्क़ ने जब बे-नियाज़-ए-दीन-ओ-दुनिया कर दिया| नज़ीर बनारसी
-
अरमान पैदा कर दिया!
ज़िंदा रखने के लिए रक्खा है अच्छा सिलसिला, इक मिटाया दूसरा अरमान पैदा कर दिया| नज़ीर बनारसी
-
तुमने ये क्या कर दिया!
बद-गुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया, ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया| नज़ीर बनारसी
-
उतरे नहीं ताल पर पंछी!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कैलाश गौतम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| कैलाश जी मुख्य रूप से हास्य-व्यंग्य की कविताओं के लिए जाने जाते थे परंतु वे नवगीत भी लिखते थे| गौतम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज…