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उतरे नहीं ताल पर पंछी!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कैलाश गौतम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| कैलाश जी मुख्य रूप से हास्य-व्यंग्य की कविताओं के लिए जाने जाते थे परंतु वे नवगीत भी लिखते थे| गौतम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज…
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साहिल का इरादा!
कश्ती मौजों में डाली है मरना है यहीं जीना है यहीं, अब तूफ़ानों से घबरा कर साहिल का इरादा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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नज़ारा कौन करे!
बसने दो नशेमन को अपने फिर हम भी करेंगे सैर-ए-चमन, जब तक कि नशेमन उजड़ा है फूलों का नज़ारा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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तमन्ना कौन करे!
जब दिल था शगुफ़्ता गुल की तरह टहनी काँटा सी चुभती थी, अब एक फ़सुर्दा दिल ले कर गुलशन की तमन्ना कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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उम्मीद दोबारा कौन!
दिल तेरी जफ़ा से टूट चुका अब चश्म-ए-करम आई भी तो क्या, फिर ले के इसी टूटे दिल को उम्मीद दोबारा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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पहला इशारा कौन करे
आदाब-ए-मोहब्बत में भी अजब दो दिल मिलने को राज़ी हैं, लेकिन ये तकल्लुफ़ हाइल है पहला वो इशारा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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तिनकों पे भरोसा!
जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे, कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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इशारा कौन करे!
ख़ाली है मिरा साग़र तो रहे साक़ी को इशारा कौन करे, ख़ुद्दारी-ए-साइल भी तो है कुछ हर बार तक़ाज़ा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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रुस्वा कौन करे!
जब दिल में ज़रा भी आस न हो इज़्हार-ए-तमन्ना कौन करे, अरमान किए दिल ही में फ़ना अरमान को रुस्वा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
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चुनाव!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के वरिष्ठ कवि एवं संपादक स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| नंदन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता – पहाड़ी के चारों तरफजतन से बिछाई हुई सुरंगों…