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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Aug 2024

    सारा जहान होता है!

    जिस के पैरों तले ज़मीन नहीं, उस का सारा जहान होता है| अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

  • 21st Aug 2024

    दुनिया के कारोबार से!

    दुनिया के कारोबार से मतलब नहीं ‘मजीद’, दिल को ख़याल-ए-यार से बहला रहे हैं हम| अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

  • 21st Aug 2024

    आइना देख देख के!

    न जाने किस की याद ने ली दिल में गुदगुदी, आइना देख देख के शरमा रहे हैं हम| अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

  • 21st Aug 2024

    किस का इंतिज़ार!

    सब अपनी अपनी राह पर आगे निकल गए, अब किस का इंतिज़ार किए जा रहे हैं हम| अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

  • 21st Aug 2024

    चिल्ला रहे हैं हम!

    नाकाम हो के अपनी सदा लौट आएगी, ये जान कर भी दश्त में चिल्ला रहे हैं हम| अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

  • 21st Aug 2024

    सौ सौ उमीदें बाँध के!

    तुम ने तो इक निगाह उठाई है इस तरफ़, सौ सौ उमीदें बाँध के इतरा रहे हैं हम| अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

  • 21st Aug 2024

    जाना कहाँ है और!

    जाना कहाँ है और कहाँ जा रहे हैं हम, अपनों की रहनुमाई से घबरा रहे हैं हम| अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

  • 21st Aug 2024

    सरिता!

    आज एक बार फिर मैं अपने समय में काव्य मंचों पर अपने हिन्दी गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ|नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत –…

  • 20th Aug 2024

    इक फूल महकता है!

    एहसास की डाली पर इक फूल महकता है, ज़ुल्फ़ों के लिए तुम ने इक रोज़ चुना होता| साग़र सिद्दीक़ी

  • 20th Aug 2024

    बे-राहनुमा होता!

    हर गाम पे काम आते ज़ुल्फ़ों के तिरी साए, ये क़ाफ़िला-ए-हस्ती बे-राहनुमा होता | साग़र सिद्दीक़ी

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