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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Feb 2024

    उम्मीद को ज़िंदा!

    मुद्दतों बा‘द वो आएगा हमारे घर में, फिर से ऐ दिल किसी उम्मीद को ज़िंदा कर ले|              मुनव्वर राना

  • 5th Feb 2024

    तिरे सामने तौबा कर ले

    गर कभी रोना ही पड़ जाए तो इतना रोना, आ के बरसात तिरे सामने तौबा कर ले|               मुनव्वर राना

  • 5th Feb 2024

    अब बड़े लोगों से!

    अब बड़े लोगों से अच्छाई की उम्मीद न कर, कैसे मुमकिन है करैला कोई मीठा कर ले|              मुनव्वर राना

  • 5th Feb 2024

    दिल ये इरादा कर ले!

    ख़ुद-ब-ख़ुद रास्ता दे देगा ये तूफ़ान मुझे, तुझ को पाने का अगर दिल ये इरादा कर ले|               मुनव्वर राना

  • 5th Feb 2024

    कमरे में अँधेरा कर ले!

    काले कपड़े नहीं पहने हैं तो इतना कर ले, इक ज़रा देर को कमरे में अँधेरा कर ले|              मुनव्वर राना

  • 5th Feb 2024

    मेरे जिस शे’र पे!

    मैं समझ जाता हूँ इस में कोई कमज़ोरी है, मेरे जिस शे‘र पे मिलती है बहुत दाद मुझे|                            मुनव्वर राना 

  • 5th Feb 2024

    कहिए, हम क्या-क्या लिखें?

    आज एक बार फिर से मैं, अपने समय में  हिन्दी काव्य मंचों पर अपने गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह ‘रंग’ जी का…

  • 4th Feb 2024

    करके ऐ ख़ाना-ख़राबी

    कम से कम ये तो बता दे कि किधर जाएगी, कर के ऐ ख़ाना-ख़राबी मिरी बर्बाद मुझे|              मुनव्वर राना  

  • 4th Feb 2024

    वो है मगर याद मुझे!

    एक क़िस्से की तरह वो तो मुझे भूल गया, इक कहानी की तरह वो है मगर याद मुझे|              मुनव्वर राना  

  • 4th Feb 2024

    कब तलक देखिए!

    मैं हूँ सरहद पे बने एक मकाँ की सूरत, कब तलक देखिए रखता है वो आबाद मुझे|               मुनव्वर राना  

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