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बहाना ढूँड रहा हूँ!
महकती रात के लम्हो नज़र रखो मुझ पर, बहाना ढूँड रहा हूँ उदास होने का| राहत इंदौरी
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घर के पास होने का!
नया बहाना है हर पल उदास होने का, ये फ़ाएदा है तिरे घर के पास होने का| राहत इंदौरी
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नज़ारे नज़र को तरसेंगे
फिर उस के बा‘द नज़ारे नज़र को तरसेंगे, वो जा रहा है ख़िज़ाँ के गुलाब दे जाओ| बशीर बद्र
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आदमी की अज़ीब हालत है!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और ग़ज़ल लेखन स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| गर्ग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की यह ग़ज़ल – आदमी की अज़ीब हालत हैवहशियों में ग़ज़ब…
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हिसाब दे जाओ!
मैं ज़र्द पत्तों पर शबनम सजा के लाया हूँ, किसी ने मुझ से कहा था हिसाब दे जाओ| बशीर बद्र