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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Feb 2024

    बहाना ढूँड रहा हूँ!

    महकती रात के लम्हो नज़र रखो मुझ पर, बहाना ढूँड रहा हूँ उदास होने का|             राहत इंदौरी

  • 2nd Feb 2024

    घर के पास होने का!

    नया बहाना है हर पल उदास होने का, ये फ़ाएदा है तिरे घर के पास होने का|             राहत इंदौरी

  • 2nd Feb 2024

    मिरा मिज़ाज नहीं!

    सबब वो पूछ रहे हैं उदास होने का, मिरा मिज़ाज नहीं बे-लिबास होने का|            राहत इंदौरी

  • 2nd Feb 2024

    डूबने का मंज़र भी!

    मिरी नज़र में रहे डूबने का मंज़र भी, ग़ुरूब होता हुआ आफ़्ताब दे जाओ|             बशीर बद्र

  • 2nd Feb 2024

    नज़ारे नज़र को तरसेंगे

    फिर उस के बा‘द नज़ारे नज़र को तरसेंगे, वो जा रहा है ख़िज़ाँ के गुलाब दे जाओ|             बशीर बद्र

  • 2nd Feb 2024

    अदब नहीं है ये!

    अदब नहीं है ये अख़बार के तराशे हैं, गए ज़मानों की कोई किताब दे जाओ|             बशीर बद्र

  • 2nd Feb 2024

    आदमी की अज़ीब हालत है! 

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और ग़ज़ल लेखन स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| गर्ग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की यह ग़ज़ल – आदमी की अज़ीब हालत हैवहशियों में ग़ज़ब…

  • 1st Feb 2024

    हिसाब दे जाओ!

    मैं ज़र्द पत्तों पर शबनम सजा के लाया हूँ, किसी ने मुझ से कहा था हिसाब दे जाओ|              बशीर बद्र

  • 1st Feb 2024

    जवाब दे जाओ!

    बहुत से और भी घर हैं ख़ुदा की बस्ती में, फ़क़ीर कब से खड़ा है जवाब दे जाओ|               बशीर बद्र

  • 1st Feb 2024

    थोड़ी शराब दे जाओ!

    उदास रात है कोई तो ख़्वाब दे जाओ, मिरे गिलास में थोड़ी शराब दे जाओ|            बशीर बद्र

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