आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और ग़ज़ल लेखन स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ|
गर्ग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की यह ग़ज़ल –

आदमी की अज़ीब हालत है
वहशियों में ग़ज़ब की ताकत है
चन्द नंगो ने लूट ली महफिल
और सक्ते में आज बहुमत है
अब किसे इस चमन की चिंता है
अब किसे सोचने की फुरसत है
जिनके पैरो तले ज़मीन नहीं
उनके सर पर उसूल की छत है
रेशमी शब्दजाल का पर्याय
हर समय, हर जगह सियासत है
वक़्त के डाकिए के हाथों में
फिर नए इंकलाब का खत है
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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