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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Aug 2024

    इस ख़िज़ाँ को !

    ग़म को दिल का क़रार कर लिया जाए, इस ख़िज़ाँ को बहार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 18th Aug 2024

    ये नहीं है सही वक़्त!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ कवि श्री राजकुमार कुंभज जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| कुंभज जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘चौथा सप्तक’ में भी इनकी कविताएं शामिल की गई थीं| लीजिए प्रस्तुत है श्री राजकुमार कुंभज जी की यह ग़ज़ल – एक…

  • 17th Aug 2024

    तितली ने ग़ज़ल!

    किसी का ज़ुल्फ़ को लहरा के चलना उफ़ तौबा, क़लम हिलाए बिना तितली ने ग़ज़ल कह दी| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    जो उस पे बूँद गिरी!

    जो उस पे बूँद गिरी अब्र कपकपा उट्ठा, इस एक लम्हे में काफ़ी घरों पे बिजली गिरी| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    सब की साँस फूल गई!

    झुका के नज़रें कोई बोला इल्तिमास-ए-दुआ, किसी को साँस चढ़ा सब की साँस फूल गई| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    परी के पावँ गुलाबी!

    परी के पावँ गुलाबी गुदाज़ रक़्स-परस्त, तड़पती मछलियाँ मेहराब-ए-लब थिरकती कली| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    कमान टूटती अंगड़ाई!

    कमर ख़याल मटकती कली लचकता शबाब, कमान टूटती अंगड़ाई हश्र जान-कनी| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    हथेली रेशमी नाज़ुक!

    हथेली रेशमी नाज़ुक मलाई नर्म लतीफ़, हसीन मरमरीं संदल सफ़ेद दूध धुली| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    आम टाटरी इमली!

    किसी की तुर्श-रुई का सबब यही तो नहीं, अचार लेमूँ अनार आम टाटरी इमली| शहज़ाद क़ैस

  • 17th Aug 2024

    शरीर शोशा शरारा!

    ये जाम छलका कि आँचल बहार का ढलका, शरीर शोशा शरारा शबाब शर शोख़ी| शहज़ाद क़ैस

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