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हया से झुकती निगाहों में!
क़रीना सरक़ा इशारा किनाया रम्ज़ सवाल, हया से झुकती निगाहों में झाँकते थे सभी| शहज़ाद क़ैस
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रुबाई नज़्म ग़ज़ल!
क़सीदा शे’र मुसद्दस रुबाई नज़्म ग़ज़ल, महकते होंटों की तफ़्सीर है भली से भली| शहज़ाद क़ैस
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बदन के जाम ने!
कलाम अरूज़ तग़ज़्ज़ुल ख़याल ज़ौक़-ए-जमाल, बदन के जाम ने अल्फ़ाज़ की सुराही भरी| शहज़ाद क़ैस
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रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश!
रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी, वो हूर ज़ीना उतरते हुए सिखाने लगी| शहज़ाद क़ैस
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अलि, मैं कण-कण को जान चली!
सभी को हमारे प्यारे देश भारत के स्वाधीनता दिवस की हार्दिक बधाई| आज एक बार फिर मैं छायावाद युग की एक प्रमुख कवियित्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|महादेवी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की यह कविता- अलि,…
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मैं ये उमीद लिए!
कभी तो मेरी भी सुनवाई होगी महफ़िल में, मैं ये उमीद लिए बार बार जाता रहा| जावेद अख़्तर
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क़रार आया तो जैसे!
अजब सा चैन था हम को कि जब थे हम बेचैन, क़रार आया तो जैसे क़रार जाता रहा| जावेद अख़्तर