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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Aug 2024

    हया से झुकती निगाहों में!

    क़रीना सरक़ा इशारा किनाया रम्ज़ सवाल, हया से झुकती निगाहों में झाँकते थे सभी| शहज़ाद क़ैस

  • 15th Aug 2024

    रुबाई नज़्म ग़ज़ल!

    क़सीदा शे’र मुसद्दस रुबाई नज़्म ग़ज़ल, महकते होंटों की तफ़्सीर है भली से भली| शहज़ाद क़ैस

  • 15th Aug 2024

    बदन के जाम ने!

    कलाम अरूज़ तग़ज़्ज़ुल ख़याल ज़ौक़-ए-जमाल, बदन के जाम ने अल्फ़ाज़ की सुराही भरी| शहज़ाद क़ैस

  • 15th Aug 2024

    रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश!

    रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी, वो हूर ज़ीना उतरते हुए सिखाने लगी| शहज़ाद क़ैस

  • 15th Aug 2024

    अलि, मैं कण-कण को जान चली!

    सभी को हमारे प्यारे देश भारत के स्वाधीनता दिवस की हार्दिक बधाई| आज एक बार फिर मैं छायावाद युग की एक प्रमुख कवियित्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|महादेवी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की यह कविता- अलि,…

  • 14th Aug 2024

    हर इक की दास्ताँ!

    हर इक की दास्ताँ सुनते हैं जैसे, कभी हम ने मोहब्बत की नहीं है| जावेद अख़्तर

  • 14th Aug 2024

    यही आदत तिरी!

    मुझे मायूस भी करती नहीं है, यही आदत तिरी अच्छी नहीं है| जावेद अख़्तर

  • 14th Aug 2024

    मगर वो बात !

    हमारे दिल में अब तल्ख़ी नहीं है, मगर वो बात पहले सी नहीं है| जावेद अख़्तर

  • 14th Aug 2024

    मैं ये उमीद लिए!

    कभी तो मेरी भी सुनवाई होगी महफ़िल में, मैं ये उमीद लिए बार बार जाता रहा| जावेद अख़्तर

  • 14th Aug 2024

    क़रार आया तो जैसे!

    अजब सा चैन था हम को कि जब थे हम बेचैन, क़रार आया तो जैसे क़रार जाता रहा| जावेद अख़्तर

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