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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Aug 2024

    शाम से तेज़ हवा!

    पेड़ के पत्तों में हलचल है ख़बर-दार से हैं, शाम से तेज़ हवा चलने के आसार से हैं| गुलज़ार

  • 13th Aug 2024

    प्रथम रश्मि!

    आज एक बार फिर मैं छायावाद के प्रमुख स्तंभ और प्रकृति के सुकुमार कवि स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ| पंत जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता- प्रथम रश्मि का आना रंगिणि!तूने कैसे पहचाना?कहाँ, कहाँ…

  • 12th Aug 2024

    इस आइने को कोई!

    बहुत दिनों से मिरा दिल उदास है ‘मोहसिन’, इस आइने को कोई अक्स अब नया दूँगा| मोहसिन नक़वी

  • 12th Aug 2024

    मैं तेरे ख़त तिरी!

    बढ़ा रही हैं मिरे दुख निशानियाँ तेरी, मैं तेरे ख़त तिरी तस्वीर तक जला दूँगा| मोहसिन नक़वी

  • 12th Aug 2024

    ज़मीं हूँ मैं भी मगर!

    तू आसमान की सूरत है गिर पड़ेगा कभी, ज़मीं हूँ मैं भी मगर तुझ को आसरा दूँगा| मोहसिन नक़वी

  • 12th Aug 2024

    इसी ख़याल में गुज़री!

    इसी ख़याल में गुज़री है शाम-ए-दर्द अक्सर, कि दर्द हद से बढ़ेगा तो मुस्कुरा दूँगा| मोहसिन नक़वी

  • 12th Aug 2024

    वफ़ा करूँगा किसी!

    वफ़ा करूँगा किसी सोगवार चेहरे से, पुरानी क़ब्र पे कतबा नया सजा दूँगा| मोहसिन नक़वी

  • 12th Aug 2024

    मैं ख़ुद उड़ा दूँगा!

    हवा का हाथ बटाऊँगा हर तबाही में, हरे शजर से परिंदे मैं ख़ुद उड़ा दूँगा| मोहसिन नक़वी

  • 12th Aug 2024

    सारे दिए बुझा दूँगा!

    ये तीरगी मिरे घर का ही क्यूँ मुक़द्दर हो, मैं तेरे शहर के सारे दिए बुझा दूँगा| मोहसिन नक़वी

  • 12th Aug 2024

    मरूँगा ख़ुद भी!

    मैं दिल पे जब्र करूँगा तुझे भुला दूँगा, मरूँगा ख़ुद भी तुझे भी कड़ी सज़ा दूँगा| मोहसिन नक़वी

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