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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Jan 2024

    जो दर्द किसी नाम से!

    उनको न पुकारो ग़म-ए-दौराँ के लक़ब* से, जो दर्द किसी नाम से मंसूब रहे हैं| *Name             जाँ निसार अख़्तर

  • 24th Jan 2024

    लगता है सफ़ीने से!

    तूफ़ान की आवाज़ तो आती नहीं लेकिन, लगता है सफ़ीने से कहीं डूब रहे हैं|             जाँ निसार अख़्तर

  • 24th Jan 2024

    वो लोग ही हर दौर में!

    वो लोग ही हर दौर में महबूब रहे हैं, जो इश्क़ में तालिब* नहीं मतलूब** रहे हैं| *Who Desires, **Who Is Desired              जाँ निसार अख़्तर

  • 24th Jan 2024

    बँसबिट्टी में!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह गीत – बँसबिट्टी में कोयल बोलेमहुआ डाल महोखाआया कहाँ बसन्त इधर हैतुम्हें…

  • 23rd Jan 2024

    तिरी नज़र का दिलों से!

    ये और बात कि हर छेड़ ला-उबाली थी, तिरी नज़र का दिलों से मोआमला तो रहा|              जाँ निसार अख़्तर

  • 23rd Jan 2024

    फ़ासला तो रहा!

    मैं तेरी ज़ात में गुम हो सका न तू मुझ में, बहुत क़रीब थे हम फिर भी फ़ासला तो रहा|               जाँ निसार अख़्तर

  • 23rd Jan 2024

    मुक़ाबला तो रहा!

    चलो न इश्क़ ही जीता न अक़्ल हार सकी, तमाम वक़्त मज़े का मुक़ाबला तो रहा|              जाँ निसार अख़्तर  

  • 23rd Jan 2024

    क़दम क़दम पे कोई!

    गुज़र ही आए किसी तरह तेरे दीवाने, क़दम क़दम पे कोई सख़्त मरहला तो रहा|               जाँ निसार अख़्तर  

  • 23rd Jan 2024

    हौसला तो रहा!

    तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा, ये कम नहीं हमें जीने का हौसला तो रहा|               जाँ निसार अख़्तर

  • 23rd Jan 2024

    डोले का गीत!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के श्रेष्ठ साहित्यकार तथा धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| भारती जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का यह गीत – अगर डोला कभी…

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